संजीवनी टुडे

बीएसए को अध्यापक का वेतन रोकने का अधिकार नहीं- उच्च न्यायालय

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 06-12-2019 22:34:19

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी किसी अध्यापक का वेतन नहीं रोक सकता फिर भी ऐसे आदेशों के खिलाफ याचिकाएं दाखिल हो रही है।


प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी किसी अध्यापक का वेतन नहीं रोक सकता फिर भी ऐसे आदेशों के खिलाफ याचिकाएं दाखिल हो रही है। न्यायालय ने सचिव ,बेसिक शिक्षा उ प्र एवं बेसिक शिक्षा परिषद को आदेश दिया है कि वह देखें कि कानून के विपरीत बी एस ए अध्यापकों के वेतन भुगतान अवैध रूप से न रोकें। अदालत ने कहा है कि अनिवार्य शिक्षा कानून की धारा 24 व नियम 19 का कड़ाई से पालन कराया जाय। इस धारा में अध्यापकों व बी एस ए के कर्तव्य निर्धारित किया गया है।

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न्यायालय ने कानून का उल्लंघन करने वाले बी एस ए व अध्यापकों की जवाबदेही तय करने का भी आदेश दिया है और सचिव को दो हफ्ते में निर्देश जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि सचिव बेसिक शिक्षा प्रदेश के सभी बी एस ए से हर छः माह में अध्यापकों द्वारा कर्तव्य पालन की रिपोर्ट लेकर अनुपालन करायें। साथ ही बी एस ए और अध्यापकों के कार्य की मानिटरिंग करें और 18 दिसम्बर को अनुपालन रिपोर्ट के साथ हलफनामा मांगा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एस पी केशरवानी ने संतोष कुमार राय की याचिका पर दिया है।

बीएसए आजमगढ़ ने कार्य मे लापरवाही करने पर याची का वेतन रोक दिया। याची सहायक अध्यापक है। उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही नहीं की गयी। अदालत ने पूछा किस कानून से वेतन भुगतान रोका गया है। कहा गया कि पेनाल्टी के खिलाफ अपील का वैकल्पिक अधिकार प्राप्त है। फिलहाल वेतन रोकने का आदेश वापस ले लिया गया तो कोर्ट ने बच्चों के शिक्षा के अधिकार को कड़ाई से पालन कराने का निर्देश दिया है।

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