संजीवनी टुडे

कोरोना के चलते घोषित पूर्णबन्दी पर्यावरण के लिए साबित हुई वरदान, प्रदूषण में आई कमी

संजीवनी टुडे 02-06-2020 11:16:56

पूरे विश्व में मानव के साथ प्रकृति के लिए यदि कोई सबसे बड़ी समस्या है तो वह पर्यावरण प्रदूषण है। पर्यावरण प्रदूषण की समस्या इतनी विकराल है कि मानव का अस्तित्व ही खतरे में आ चुका है।


फतेहपुर। पूरे विश्व में मानव के साथ प्रकृति के लिए यदि कोई सबसे बड़ी समस्या है तो वह पर्यावरण प्रदूषण है। पर्यावरण प्रदूषण की समस्या इतनी विकराल है कि मानव का अस्तित्व ही खतरे में आ चुका है। मानव के अस्तित्व की जीवनदायिनी ऑक्सीजन का प्रतिशत भूमण्डल में घटता जा रहा है। जिसका दुष्प्रभाव मानव जिन्दगी में कई तरह से देखने को कहा मिल रहा है। लोगों को स्वांस सम्बन्धी जानलेवा बीमारियां हो रही हैं। चर्मरोग से लोग ग्रसित हो रहे हैं। तापमान बढ़ता जा रहा है जिससे आग उगलती धूप व गर्मी से धरा में जीवन के लिए खतरा पैदा हो गया है। 

ये रही मानव के खतरे की बात लेकिन प्रदूषण का कुप्रभाव पूरी धरा में देखने को मिल रहे हैं। जैव विविधता समाप्त होती जा रही हैं। मौसम में परिवर्तन दैवीय आपदा का रूप धारणा करता जा रहा है। जिससे हर वर्ष सर्दी, गर्मी व बरसात से लाखों लोग असमय ही मौत की आगोश में समाते जा रहे हैं। विज्ञान जिसे मानव के लिए वरदान कहा जा रहा है वह पर्यावरण प्रदूषण से मानव को बचाने का स्थायी समाधान खोजने में अभी तक तो नाकाम ही साबित हुई है। इन सब समस्याओं के साथ इस वक्त पूरे विश्व में कोरोना रूपी आपदा ने तो मानव को बहुत नजदीक से मौत का मंजर दिखाया लेकिन हर बुरी चीज में अच्छाई में छिपी होती है। बस उन्हें समझा जाय, परखा जाय और फिर अनुकरण कर उसे लाभप्रद बनाया जाय। 

आज वैश्विक आपदा कोरोना की बात की जाय तो उसके संक्रमण रोकथाम व बचाव के लिए देश में दो महीने से पूर्णबन्दी (लॉकडाउन) लागू है। जिससे मानव जिन्दगी की सभी गतिविधियों को विराम लगा रहा। सभी लोग घरों तक स्वयम् को सीमित करने के लिए विवश हुए। उससे पर्यावरण प्रदूषण में जो कमी दर्ज की गई उसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। जनता ने प्रदूषण से जहां राहत महसूस की वहीं वैज्ञानिकों के लिए पूर्णबन्दी प्रदूषण का एक विकल्प साबित हो सकता है। जिसका यदि सप्ताह में एक दिन भी पालन किया जाय तो पर्यावरण प्रदूषण को काफी हद तक संतुलित रखा जा सकता है। जिस पर समाज व सरकार को मंथन करना चाहिए। 

कोरोना के संक्रमण की रोकथाम व बचाव का जो विकल्प प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुना वह पूरी तरह से कारगर भी साबित हुआ। जहां विश्व के तमाम विकसित देश जिनकी जनसंख्या भारत से दस से बीस गुना तक कम है जो सभी संसाधनों से लैस हैं बीमारियों से लड़ने के लिए अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं व उच्च क्वालिटी के उपकरण पर्याप्त मात्रा में हैं वहां की स्थित भारत से अधिक भयावह रही। अधिक लोग संक्रमित हुए और मौतें भी अधिक रहीं। ऐसे हालात में हमारे प्रधानमंत्री एक अरब तीस करोड़ आबादी को बचाने में कामयाब ही नहीं हुए बल्कि संक्रमण के फैलने को रोकने में भी सफल हुए। प्रधानमंत्री द्वारा सबसे अघिक योगदान पूर्णबन्दी के निर्णय का सख्ती से अनुपालन को जाता है। इस पूर्णबन्दी में जिस तरह सभी सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक गतिविधियों पर पाबन्दी रही उसका असर कोरोना के साथ पर्यावरण प्रदूषण के संरक्षण पर व्यापक रूप से देखने को मिला। इस असर को आम जनता ने भी महसूस किया और व्यक्तिगत जीवन में प्रदूषण से होने वाली बीमारियों में राहत का अनुभव किया।

पेट्रोल व डीजल वाहनों के न चलने से प्रदूषण पर आयी कमी
पूर्णबन्दी के चलते जिस तरह से घरों से निकलने पर पाबन्दी रही उससे वाहन भी बाहर नहीं निकल सके। सड़के सूनी और शोरगुल रहित सन्नाटे की मिसाल बन गई। जहां हर व्यक्ति मोटरसाइकिल व चार पहिया के बगैर निकलता ही नहीं था एक जिले में लाखों लीटर पेट्रोल-डीजल हर रोज जलता रहा हो। ऐसे में पेट्रोल पम्प में ताला लग जाना बड़ी बात रही।उसका सीधा असर पर्यावरण प्रदूषण में देखने को मिला। जिले के समाजसेवी व व्यापारी प्रदीप गर्ग का कहना है कि कोरोना महामारी ने पर्यावरण प्रदूषण से बचाव का एक विकल्प हमारे समक्ष पेश किया है। यदि सभी लोग सप्ताहिक छुट्टी के दिन प्राईवेट वाहन का उपयोग न करने का संकल्प ले तो निश्चय ही पर्यावरण प्रदूषण को कम कर सकते हैं। जो पर्यावरण संरक्षण के लिए एक कारगर उपाय हो सकता है। 

फैक्टरियों व ईंट भट्टों के बन्द होने से नदियों का प्रदूषण थमा
जिले के फैक्ट्री हब क्षेत्र मलवां में मेटल एण्ड एलॉय फैक्ट्री के मालिक सतेन्द्र पटेल का कहना है। कि पूर्णबन्दी से जहां तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ा वहीं इस पूर्णबन्दी ने पर्यावरण प्रदूषण को क्षणिक ही सही रोक दिया।  पूर्णबन्दी से फैक्टरियां भी प्रभावित हुईं। बिना कर्मचारी व मजदूर के फैक्टरियों को बन्द करना पड़ा। लॉकडाउन में सभी औद्योगिक गतिविधियों पर भी पाबन्दी लगाई गई थी। जिससे उन फैक्टरियों से निकलने वाला प्रदूषित पानी अब नदियों में आना बन्द रहा जिससे नदियां चन्द दिनों के लिए ही सही स्वच्छ व निर्मल दिखने लगी है। चिमनियों से निकलने वाले धुएं से भी वायु प्रदूषण में लगाम लगी।

सामाजिक गतिविधियों पर पाबंदी से कचरायुक्त प्रदूषण पर लगा लगाम
पूर्णबन्दी के चलते सभी लोगों की जिन्दगी घर की चाहारदीवारी तक सीमित होकर रह गयी। बिन्दकी नगर पालिका के सफाई इंस्पेक्टर राजेन्द्र सिंह ने बताया कि पूर्णबन्दी ने शहर की गंदगी को कम किया है जो कचरा पहले निकलता था अब उसका एक तिहाई से भी कम निकल रहा है और सार्वजनिक स्थानों, पार्को, व्यवसायिक स्थलों आदि जगहों तक नहीं जा सके जिससे पॉलिथीन सम्बंधित कचरा भी फैलने से रुक गया। शहरों में कूड़े के ढेर दिखने कम हो गये जिससे नाली- नाला में जल भराव पर कमी आई है।अब नालियों में पानी का बहाव बिना बाधा के हो रहा है। 

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