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पुस्तकें ज्ञान ही नहीं देती, हमें विशेष भी बनाती हैं: श्रीनिवास

संजीवनी टुडे 24-04-2019 13:59:56


नई दिल्ली। साहित्य अकादमी के सचिव के. श्रीनिवास राव ने कहा है कि पुस्तकें केवल ज्ञान नहीं देती बल्कि हमें विशेष बनाती हैं। किताबें मां जैसी होती हैं जो हमें बेहतर नागरिक बनने की शिक्षा देती हैं।

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बुधवार को श्रीनिवास अकादमी द्वारा विश्व पुस्तक दिवस पर ‘पुस्तकें, जिन्होंने रचा हमारा संसार’ विषय पर आयोजित परिसंवाद में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि किताबों के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती और इस डिजिटल युग में भी उनका महत्त्व कम नहीं हुआ है। इस अवसर पर प्रख्यात नाट्यकर्मी एम.के रैना ने युवा पीढ़ी से किताबें पढ़ने पर जोर देते हुए कहा कि हम सभी को साहित्य अवश्य पढ़ना चाहिए। यह हमें मानवीय जीवन को अलग तरीके से समझने का दृष्टिकोण बताता है। 

मैंने पहली पुस्तक अपने कॉलेज की लाइब्रेरी में पढ़ी थी और वह अब्राहम लिंकन द्वारा लिखी गई थी। दूसरी पुस्तक जिससे वे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, गांधीजी की आत्मकथा थी। उन्होंने कहा कि गांधी मेरे रॉक स्टार थे और आज भी हैं। रैना ने प्रेमचंद की कहानी कफन का जिक्र करते हुए कहा कि इन सबके जरिये ही मैं अपने समाज को वर्तमान से जोड़ पाता हूं। इसी क्रम में उन्होंने कविताओं तथा धर्मवीर भारती के कालजयी नाटक अंधायुग का भी जिक्र किया।

कार्यक्रम में उपस्थित सीएजी के एडीशनल डिप्टी कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल के.के. श्रीवास्तव ने कहा कि वे आधुनिक समाज के लिए दो लेखकों सिग्मंड फ्रायड और वल्दीवो निकोवोव की पुस्तकों को बेहद महत्त्वपूर्ण मानते हैं, क्योंकि इनके जरिये ही समाज में मानसिक रोगियों के इलाज के लिए बेहतर समझ विकसित हो पाई। 

उन्होंने सिग्मंड फ्रायड की 1902 में प्रकाशित पुस्तक तथा निकोवोव की 2018 में प्रकाशित पुस्तक की जानकारी पाठकों से साझा करते हुए कहा कि इनसे हमारे सपनों को व्यवस्थित रूप से विश्लेषित करने की परंपरा शुरू हो पाई है, जो आगे चलकर मानसिक रोगों के इलाज में बेहद कारगर साबित हुई।

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव प्रणव खुल्लर ने 'वॉर एंड पीस', 'महाभारत' आदि का जिक्र करते हुए कहा कि वे इनसे बहुत प्रभावित हुए हैं। उन्होंने योगानंद की जीवनी का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि ये पुस्तक 1946 में प्रकाशित हुई थी और अभी तक 52 भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं। ये है तो योगी की आत्मकथा, लेकिन उसको इतने रोचक तरीके से लिखा गया है कि आप इसे उपन्यास समझते हैं। यह पुस्तक आधुनिक संसार और आध्यात्मिक संसार के बीच एक सेतु का कार्य करती है।

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प्रख्यात ओडिशी, छऊ और मणिपुरी नृत्यांगना सोरेन लोवेन ने अपने जीवन को प्रभावित करने वाली पुस्तकों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पुस्तकों का संसार इतना विशाल है कि उसकी तुलना आसमान में चमकते सितारों से की जा सकती है। उन्होंने एनी फ्रेंक की डायरी और 'सिमोन द बोउआर' का जिक्र करते हुए कहा कि कला और पुस्तकें एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती है और उससे हमारा प्रदर्शन और जीवंत और बेहतर हो जाता है। 

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