संजीवनी टुडे

भाजपा विधायक कर्णवाल को जाति प्रमाण पत्र मामले में मिली बड़ी राहत

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 11-09-2019 18:57:04

उत्तराखंड के झबरेड़ा (हरिद्वार) के भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल को जाति प्रमाण पत्र के मामले में बड़ी राहत मिली है।


नैनीताल। उत्तराखंड के झबरेड़ा (हरिद्वार) के भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल को जाति प्रमाण पत्र के मामले में बड़ी राहत मिली है। राज्य स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति ने उन्हें जाति प्रमाण पत्र के मामले में क्लीन चिट दे दी है। समिति ने कहा है कि भाजपा विधायक का जाति प्रमाण पत्र वैध दस्तावेज है। सरकार की ओर से चार सदस्यीय समिति की रिपोर्ट बुधवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की अदालत में पेश की गयी। मामले की जांच के लिये चार सदस्यीय समिति की बैठक विगत सात सितम्बर को हुई थी। समिति ने सभी दस्तावेजों की जांच के बाद भाजपा विधायक को क्लीन चिट दे दी है। मुख्य स्थायी अधिवक्ता परेश त्रिपाठी आज इस मामले में खुद अदालत में पेश हुए और उन्होंने कोर्ट के समक्ष यह रिपोर्ट रखी। यूनीवार्ता के पास जांच रिपोर्ट की प्रति मौजूद है।

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हरिद्वार निवासी विपिन तोमर की ओर से इसी साल एक जनहित याचिका दायर कर भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल के जाति प्रमाण पत्र की वैधानिकता को चुनौती दी गयी थी। याचिका में कहा गया था कि विधायक कर्णवाल ने धोखाधड़ी से अपना जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया है। यह भी कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं।

मामले की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को दो जुलाई तक मामले में स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने विधायक कर्णवाल को भी पक्षकार बनाते हुए इस प्रकरण में रिपोर्ट देने को कहा था। इसके बाद कोर्ट ने सरकार व जांच समिति को निर्देेश दिया था कि वह 30 अगस्त तक जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। जांच समिति की ओर से 30 अगस्त तक रिपोर्ट पेश नहीें की गयी। इसके बाद अदालत ने इस मामले में जांच समिति के सभी सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। कोर्ट के सख्त रूख के बाद समिति की ओर से विगत सात सितंबर को रिपोर्ट पर अंतिम फैसला ले लिया गया।

जांच समिति की रिपोर्ट के बाद कर्णवाल ने कहा कि आज दूध का दूध व पानी का पानी हुआ है। वह इस मामले में पिछले 14 साल से संघर्ष कर रहे हैं। आज सत्य की विजय हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि न्यायालय से भी उन्हें न्याय मिलेगा। इसमें कोई जालसाजी या धोखाधड़ी नहीं हुई है। उन्होंने इसे अपने राजनैतिक विरोधियों की साजिश करार दिया।

कर्णवाल ने बताया कि उन्हें वर्ष 2005 में स्थानीय तहसीलदार द्वारा वैधानिक तरीके से जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया है। मैं वर्ष 2005 से 2010 तक हरिद्वार को जिला पंचायत सदस्य और 1995 से 1997 तक हरिद्वार की गवर्निंग कमेटी का सदस्य भी रहा हूं। वर्ष 2017 में विधायक चुना गया है।

कर्णवाल ने इस साल की शुरूआत में भी उच्च न्यायालय में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एक याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने वर्ष 2007 में चार लोगों के खिलाफ कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि उनके राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी उनके राशन कार्ड व परिवार रजिस्टर के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनके खिलाफ साजिश करने कर रहे हैं। उनके राजनैतिक भविष्य को चैपट करना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस पुलिस दोषी लोगों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। इसके बाद कोर्ट ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए पुलिस महानिरीक्षक से जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा था।

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