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भाजपा ने कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए दिल्ली सरकार को ठहराया जिम्मेदार

संजीवनी टुडे 29-05-2020 20:21:16

भाजपा विधायकों ने राजधानी दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामले, सरकारी अस्पतालों की खस्ता हालत, राशन वितरण में धांधली और भीषण गर्मी में पानी के लिए मच रहे हाहाकार के लिए सत्तारूढ़ दल आम आदमी पार्टी (आप) को जिम्मेदार ठहराया है।


नई दिल्ली। भाजपा विधायकों ने राजधानी दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामले, सरकारी अस्पतालों की खस्ता हालत, राशन वितरण में धांधली और भीषण गर्मी में पानी के लिए मच रहे हाहाकार के लिए सत्तारूढ़ दल आम आदमी पार्टी (आप) को जिम्मेदार ठहराया है। 

विधायकों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के निजी अस्पताल के प्रबंधकों के बीच सांठगांठ का आरोप भी लगाया है। विधायकों का कहना है कि राज्य सरकार से मुफ्त और रियायती दरों में जमीन लेकर बने इन निजी अस्पतालों को मौजूदा हालात में कोरोना मरीजों का मुफ्त में इलाज करना चाहिए था। पर, इसके विपरीत यह अस्पताल मरीजों से मोटी रकम वसूलने में लगे हुए हैं।  

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने शुक्रवार को दिल्ली के मौजूदा हालात पर पत्रकार वार्ता की। विधायकों ने कहा कि दिल्ली के करीब ऐसे 62 निजी अस्पताल हैं जो सरकार से मुफ्त या रियायती दरों पर जमीन लेकर बनाए गए हैं। 

उन्होंने बताया कि अपोलो अस्पताल को महज एक रुपये में 15 एकड़ जमीन दी गई थी और बदले में सरकार एवं अस्पताल प्रबंधन के बीच यह समझौता हुआ कि अस्पताल में 33 फीसद बेड दिल्ली के जरूरतमंद लोगों के मुफ्त इलाज के लिए आरक्षित रहेंगे और 40 फीसद मरीजों का ओपीडी में मुफ्त इलाज किया जाएगा। इस तरफ अन्य निजी अस्पतालों के बीच मुफ्त इलाज का समझौता हुआ था। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय दिल्ली के 62 निजी अस्पतालों में करीब तीन हजार बेड हैं। जहां पर कोरोना मरीजों का निःशुल्क इलाज हो सकता है, लेकिन सरकार की सांठगांठ के चलते मोटी
रकम वसूली जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष बिधूड़ी ने कहा कि विधानसभा में जब कोरोना पर चर्चा हुई तो उन्होंने भाजपा विधायक दल की ओर से मुफ्त एवं रियायती दरों पर जमीन लेकर बनाए गए निजी अस्पतालों का मामला सदन में उठाया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त एवं रियायती दरों पर जमीन लेकर बने इन निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज का प्रबंध करने को सरकार से कहा है। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली सरकार पहले ही उनके सुझावों पर अमल कर लेती तो सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं पड़ती।

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