संजीवनी टुडे

जलवायु परिवर्तन की चुनौतयों से निपटने के लिए बिहार ने देश को दिखाई राह: चौहान

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 26-01-2020 13:45:11

राज्यपाल फागू चौहान ने विज्ञान एवं तकनीक के विकास का पर्यावरण पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव के प्रति लोगों को सचेत करते हुए आज कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने जल-जीवन-हरियाली अभियान की शुरुआत कर देश को रास्ता दिखाया है।


पटना। बिहार के राज्यपाल फागू चौहान ने विज्ञान एवं तकनीक के विकास का पर्यावरण पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव के प्रति लोगों को सचेत करते हुए आज कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने जल-जीवन-हरियाली अभियान की शुरुआत कर देश को रास्ता दिखाया है।

चौहान ने 71वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर यहां ऐतिहासिक गांधी मैदान में झंडोत्तोलन के बाद राज्य की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि इन दिनों जलवायु परिवर्तन सबसे बड़े खतरे के रूप में उभरा है। पूर्व में पर्यावरण भी संतुलित था, नदियों का जल भी साफ था और आबादी भी कम थी। धीरे-धीरे आबादी बढ़ती गई, विज्ञान एवं तकनीक का विकास हुआ। इस विकास का हानिकारक प्रभाव पर्यावरण पर भी पड़ा है। इसका असर ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन के रूप में दिखने लगा है, जिससे कहीं असमय वर्षा, कहीं सुखाड़ तो कहीं बाढ़ की समस्या, आंधी-तूफान की बढ़ती तीव्रता जैसी समस्याएं दिख रही हैं। मानूसन का पैटर्न भी बदल रहा है।

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राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के चलते बिहार में भी कम और अनियंत्रित वर्षापात, वर्षा में लंबा अंतराल तथा अचानक भारी वर्षा जैसी स्थितियां उत्पन्न हो रही है। बिहार के बाढ़ और सुखाड़ के हालात का सामना करना पड़ रहा है। अल्प वर्षापात के कारण भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में दक्षिणी बिहार के जिलोें के साथ-साथ उत्तरी बिहार कुछ जिलों में जलस्तर में गिरावट आई। 

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न समस्याओं से निपटने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने 26 अक्टूबर 2019 को ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान की शुरुआत की। इसके तहत 24 हजार 524 करोड़ रुपये की योजनाओं का मिशन मोड में क्रियान्वयन किया जा रहा है तथा इसके अनुश्रवण एवं परामर्श की संस्थागत व्यवस्था की गई है।

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चौहान ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत सार्वजनिक जल-स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराना, जल-स्रोतों एवं कुओं का जीर्णोद्धार कराना, सोख्ता का निर्माण, नए जल-स्रोतोें का सृजन, जल संरक्षण के लिए चेक डैम का निर्माण, सरकारी भवनों की छतों पर वर्षा जल संचयन, मौसम के अनुकूल कृषि, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, सौर ऊर्जा पर जोर तथा जागरूकता अभियान शामिल है। 

उन्होंने कहा कि जल-जीवन-हरियाली जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके तहत 19 जनवरी 2020 को राज्य में 18 हजार किलाेमीटर से अधिक लंबी मानव श्रृंखला बनाई गई, जिसमें पांच करोड़ 16 लाख से अधिक लोगोें भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। पर्यावरण संरक्षण के समर्थन में बनी यह ऐतिहासिक मानव श्रृंखला विश्व में किसी भी मुद्दे पर बनी अबतक की सबसे लंबी मानव श्रृंखला है।

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