संजीवनी टुडे

अमित जेठवा हत्याकांड : भाजपा के पूर्व सांसद दीनू बोघा सोलंकी समेत 7 को उम्रकैद

संजीवनी टुडे 11-07-2019 17:17:58

जूनागढ़ के आरटीआई कार्यकर्ता अमित जेठवा (35) हत्याकांड में भाजपा के पूर्व सांसद दीनू बोघा सोलंकी समेत सभी सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।


अहमदाबाद। जूनागढ़ के आरटीआई कार्यकर्ता अमित जेठवा (35) हत्याकांड में भाजपा के पूर्व सांसद दीनू बोघा सोलंकी समेत सभी सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही दीनू बोघा और उनके भतीजे शिवा सोलंकी पर 15-15 लाख रुपये का जुमार्ना भी लगाया गया है। इससे पहले अहमदाबाद की सीबीआई कोर्ट ने शनिवार को पूर्व सांसद सोलंकी सहित सभी सातों आरोपितों को हत्या और आपराधिक साजिश रचने का दोषी माना था।

भाजपा के पूर्व सांसद दीनू बोघा सोलंकी सहित सात आरोपितों को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जज केएम दवे ने हत्या और आपराधिक साजिश के तहत दोषी ठहराया है। आज सीबीआई की विशेष अदालत में सात अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

अदालत ने जेठवा की हत्या के दोषियों को उम्रकैद की सजा के साथ जुर्माने से भी दण्डित किया है। इसमें से 11 लाख अमित जेठवा के परिवार को दिए जाएंगे। पांच लाख अमित जेठवा की पत्नी को और तीन-तीन लाख उनके दोनों बच्चों को दिए जाएंगे। 

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दीनू बोघा सोलंकी को 15 लाख रुपये जुर्माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। अन्य दोषियों में शैलेश पंड्या को 10 लाख रु. जुर्माना के साथ शस्त्र अधिनियम में आजीवन कारावास की सजा दी गई है। उदाजी ठाकोर पर 25,000 रु. जुर्माना लगाया गया। शिवा पचान पर 8 लाख रु. जुर्माना और  धारा 302, और 120 के तहत दोषी ठहराया गया है। शिवा सोलंकी पर 15 लाख जुर्माना, बहादुर सिंह वाढेर (पुलिस कांस्टेबल)- 302,120-बी और 10 लाख जुर्माना, संजय चौहान को एक लाख जुर्माना की सजा से दंडित किया गया है।

सीबीआई के तत्कालीन डीआईजी अरुण बोथरा ने दीनू बोघा सोलंकी को गिरफ्तार किया था। दोषी करार दिए गए दीनू बोघा को उसके फार्म हाउस के नौकर राम हज़ा की जुबानी भारी पड़ गयी। 

दीनू बोघा सोलंकी सहित आरोपितों में उनके भतीजे शिवा सोलंकी, शैलेश पंड्या, बहादुर सिंह वढेर (कांस्टेबल), शिवा  पचाण, संजय चौहान और उदाजी ठाकोर शामिल हैं। 20 जुलाई, 2010 को अमित जेठवा को उच्च न्यायालय के सामने सत्यमेव कॉम्प्लेक्स के पास एक बाइक पर सवार दो लोगों ने  गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। इस मामले में कई कानूनी लड़ाइयों के बाद सीबीआई को जांच सौंपी गई थी।

सीबीआई के तत्कालीन डीआईजी अरुण बोथरा ने दीनू बोघा को 5 नवंबर, 2013 को गिरफ्तार कर लिया और चार दिनों की रिमांड हासिल की और सात आरोपितों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट फाइल की, जिसमें दीनू बोघा भी आरोपित था। 27 गवाहों का फिर से परीक्षण किया गया। इस मामले की सुनवाई के दौरान 155 गवाह मुकर गए। 

27 गवाहों का उच्च न्यायालय के आदेश पर फिर से परीक्षण किया गया था लेकिन ये गवाह दूसरी बार फिर से गवाही से मुकर गए | हालांकि अदालत ने मुख्य गवाह राम हाज़ा और समीर वोरा की गवाही को 164 के तहत बाइक, रिवाल्वर, कारतूस, मेडिकल प्रूफ, मोबाइल फोन डिटेल के तहत ध्यान में रखते हुए आरोपितों को दोषी ठहराया है- ऐसा कानून के जानकार मान रहे हैं। 

सीबीआई के अभियोजक ने मामले को आजीवन कारावास और सख्त सजा के लिए प्रस्तुत किया जबकि बचाव पक्ष के वकील ने यह कहकर सजा से छूट की मांग की कि पूर्व सांसद दीनू बोघा बूढ़े हो रहे हैं | तब सीबीआई अदालत ने सभी आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। 

सीबीआई ने जूनागढ़ के पूर्व सांसद दीनू बोघा सहित सात आरोपितों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दायर किया। जांच में सामने आया कि अमित जेठवा ने जूनागढ़ गिर जंगलों में अवैध खनन के संबंध में जनहित याचिका दायर की थी। अमित के पिता भीखाभाई ने अमित जेठवा की हत्या का आरोप दीनू बोघा सोलंकी पर लगाया था। 

इस घटना में पुलिस ने भाजपा के तत्कालीन सांसद दीनू वोघा सोलंकी और उनके भतीजे शिवा सोलंकी को गिरफ्तार किया लेकिन क्राइम ब्रांच ने दीनू बोघा सोलंकी को क्लीन चिट दे दी | यह जांच सुरेंद्रनगर के एसपी राघवेंद्र वत्स को सौंपी गई। 2012 में राघवेंद्र वत्स ने दीनू बोघा सोलंकी को क्लीन चिट देने को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी। तब अदालत ने यह मामला सीबीआई के सुपुर्द करने का आदेश दिया। 2013 में सीबीआई ने दीनू सोलंकी को गिरफ्तारी कर जांच शुरू की। दीनू बोघा सोलंकी 2009 से 2014 तक जूनागढ़ से भाजपा के सांसद रहे हैं।

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