संजीवनी टुडे

माया-अखिलेश की राहें अलग होने के बाद उपचुनाव का सियासी दंगल रोचक होने के आसार

संजीवनी टुडे 05-06-2019 15:45:50

लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद मायावती के सपा-बसपा-रालोद गठबंधन से अलग होने पर उपचुनाव में सियासी दंगल रोचक होने के आसार हैं।


लखनऊ। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद मायावती के सपा-बसपा-रालोद गठबंधन से अलग होने पर उपचुनाव में सियासी दंगल रोचक होने के आसार हैं। लोकसभा चुनाव में इन दलों के नेता जहां संयुक्त रैलियां करते नजर आये थे। वहीं उपचुनाव आते-आते अलग होकर ये एक दूसरे को निशाना बनाते दिखेंगे। सपा और बसपा दोनों के लिए ही ये उपचुनाव अहम हैं। इसमें अखिलेश और मायावती फिर एक दूसरे के प्रतिद्वंदी की तरह अपनी पार्टी का प्रचार करेंगे। दोनों की कोशिश होगी कि भाजपा के साथ एक-दूसरे का मुकाबला करते हुए वह जीत दर्ज कर सकें।बसपा सुप्रीमो मायावती के उपचुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने के ऐलान के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से भी ऐसी घोषणा हो चुकी है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज खुलकर मान भी लिया कि लोकसभा चुनाव में गठबंधन एक प्रयोग था, जो सफल नहीं हुआ। 

अखिलेश के मुताबिक सपा आगे की तैयारियों में जुट गई है। उन्होंने मायावती के सपा से यादव वोटबैंक खिसकने के आरोपों पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने जरूर इसे खारिज किया है। उन्होंने कहा कि कभी कोई जाति पूरी तरह साथ नहीं रही। रामगोपाल ने सपा के वोट बसपा को ट्रांसफर होने का दावा करते हुए कहा कि अगर वोट ट्रांसफर नहीं हुए होते बसपा उम्मीदवार नहीं जीत दर्ज करते। रामगोपाल ने कहा कि हमारा दल बसपा से बड़ा और पुराना है। अगर बसपा अकेले चुनाव लड़ेगी तो हम भी अकेले लड़ेंगे। उधर गठबंधन के तीसरे घटक दल राष्ट्रीय लोक दल के प्रदेश अध्यक्ष मसूद अहमद ने भी कहा है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपचुनाव में अपने उम्मीदवार उतारेगी।  सीटों पर उम्मीदवार उतारने के सम्बन्ध में राष्ट्रीय नेताओं के साथ बैठक के दौरान इस मामले पर चर्चा की जायेगी। फैसला चौधरी अजीत सिंह और जयंत चौधरी करेंगे।

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वहीं उन्होंने गठबंधन को लेकर कहा कि हमें समाजवादी पार्टी के कोटे से सीटें मिली थीं। हमारी इच्छा है कि गठबंधन एकजुट रहे और मजबूत रहे। कांग्रेस को भी गठबंधन का हिस्सा होना चाहिए था। हमारी इच्छा है कि गठबंधन अपना कुनबा बढ़ाए ताकि हम भाजपा के खिलाफ एक मजबूत ताकत बनकर उभर सकें। नफा नुकसान के बारे में विश्लेषण बाद में किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक अजित सिंह उपचुनाव को लेकर जल्द पार्टी का रूख स्पष्ट कर सकते हैं। जिन सीटों पर उपचुनाव होना है, उनमें रालोद की सियासी स्थिति तो मजबूत नहीं है। फिर भी चुनाव को लेकर या तो उसकी राहें अलग हो हो सकती हैं या फिर वह सपा के पाले में ​नजर आ सकती है।  लोकसभा चुनाव में रालोद को गठबंधन से तीन सीटें मिली थीं और इसमें तीनों ही जगह मुजफ्फरनगर से अजित सिंह, बागपत से उनके बेटे जयंत चौधरी और मथुरा से कुंवर नरेंद्र सिंह चुनाव हार गये। गौरतलब है कि प्रदेश में 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इनमें गंगोह (सहारनपुर), टूंडला, गोविंदनगर (कानपुर), लखनऊ कैंट, प्रतापगढ़, मानिकपुर चित्रकूट, रामपुर, जैदपुर (बाराबंकी), बलहा (सुरक्षित), बहराइच, इगलास (अलीगढ़) और जलालपुर (अंबेडकरनगर) शामिल हैं। 

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इनमें नौ सीटें भाजपा विधायकों के लोकसभा चुनाव जीतने की वजह से रिक्त हुई हैं। इनमें कानपुर की गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक सत्यदेव पचौरी कानपुर लोकसभा से, लखनऊ कैंट से पार्टी विधायक रीता बहुगुणा जोशी इलाहाबाद से, फिरोजाबाद की टूंडला से भाजपा विधायक एसपी सिंह बघेल आगरा से , बाराबंकी की जैदपुर से भाजपा विधायक उपेंद्र रावत बाराबंकी से, चित्रकूट के मानिकपुर से भाजपा विधायक आरके पटेल बांदा से, बहराइच की बलहा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक अक्षयवर लाल गोंड बहराइच से, गंगोह विधानसभा सीट से विधायक प्रदीप चौधरी कैराना से, अलीगढ़ की इगलास विधानसभा सीट से भाजपा विधायक राजवीर बाल्मीकि हाथरस से, प्रतापगढ़ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक संगमलाल गुप्त प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बने हैं। इसके अलावा रामपुर विधानसभा सीट से सपा विधायक आजम खां रामपुर लोकसभा और जलालपुर विधानसभा सीट से बसपा विधायक रितेश पांडेय अंबेडकरनगर संसदीय सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं।

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