संजीवनी टुडे

"अफसाने का अफसाना" में देश के प्रख्‍यात कहानीकारों ने सुनाए कई अफसाने

संजीवनी टुडे 14-07-2019 18:13:37

कार्यक्रम में देश के प्रख्यात कहानीकारों ने शिरकत की।


भोपाल। मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी संस्कृति विभाग के तत्‍वावधान में "अफसाने का अफसाना" शीर्षक से कार्यक्रम नईम कौसर की अध्यक्षता में रविवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन परिसर स्वराज भवन में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में देश के प्रख्यात कहानीकारों ने शिरकत की।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में मप्र उर्दू अकादमी की सचिव डॉ. नुसरत मेंहदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि उर्दू अकादमी निरंतर साहित्य की हर विद्या पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसी श्रृंखला में आज का यह कार्यक्रम अफसाने का अफसाना आयोजित किया गया है। अकादमी की कोशिश है कि उर्दू उपन्‍यास में स्थापित कहानीकारों, उपन्यासकारों के साथ नये लिखने वालों को भी अवसर प्रदान किया जाये। आज के कार्यक्रम में ऐसा ही संतुलित प्रयास किया गया है।

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नईम कौसर ने कहा कि उर्दू अफसानों ने कई दौर देखे और यह दौर इस उपन्‍यास के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। यदि नये लिखने वालों को सही समय पर सही मंच मिल जाये। इस मौके पर लखनऊ से आये फैयाज रफअत ने अपना अफसाना "नग़मा-ए-आशोब" सुनाते हुये कहा कि "रात और दिन की सरहदें नहीं थीं कुछ नहीं था बस एक जाते वाहिद सिर्फ एक जात अपने आप में जिन्दा थी और सांस ले रही थी। इस जात के अलावा न कभी कुछ था न अब कुछ है। यह जाते वाहिद सब कुछ है"। 

दिल्ली से आये सलमान अब्दुस्समद ने अपनी कहानी "नया वजूदा" में किसानों के मामले को बहुत अच्छे अंदाज से पेश किया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद के जमाने में किसानों की जो हालत थी, वही हालात आज भी है। मेरठ से पधारे असलम जमशेदपुरी ने अपना अफसाना "आधी अधूरी कहानी" में भारत के वर्तमान समाज में आने वाले परिवर्तन को शब्दों में ढाला है। 

यह कहानी छोटी-छोटी घटनाओं को एक माला में पिरोती हुई हमारे सामने एक ऐसा दृश्‍य पेश करती है जो एक बड़ा सच है। इसी तरह इकबाल मसूद ने अपनी कहानी "बीरबहूटियां सुनाते हुये कहा कि "यह कहानी पठानों के बारे में है, जो जंग से नफरत करते हैं और जिनमें झगड़े पुश्‍त दर पुश्‍त चलते हैं। इस सबके बाद भी संगीत उनको प्रिय हैं। हां और यह कहानी एक संगीतकार की कहानी है जो मारा जाता है।" 

बिलासपुर से आयी अतिया मसूद ने "हौसला है अभी" सुनाते हुये कहा कि "कहानी यूं तो एक छोटी सी चिड़िया और उसके घोंसले की है, जिसे दुश्‍मन ने बरबाद कर दिया, पर इस कहानी को हर दौर से जोड़ा जा सकता है। हर दौर में कमजोर के घर को बरबाद किया जाता है। वहीं, भोपाल की शिफाली पांडे ने अपने चार छोट-छोटे अफसाने सरहद का इश्‍क, कश नहीं कश, मेरे नाम का सच और अम्मा सुनाई। 

इस मौके पर रुशदा जमील जो कार्यक्रम का संचालन भी कर रही थीं, उन्होंने अपना मुख्तसर अफसाना "हिसार" सुनाते हुये कहा कि यह एक इंतेजार है, जो अपने महबूब के लिये बहुत सारी तैयारी से बैठी है, मगर वह नहीं आता। उसके लिये तैयार किये तोहफे लिये बैठी रह गई।

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