संजीवनी टुडे

गुरुकुल प्रकल्प में योगदान देने वाले 51 आचार्य हुए सम्मानित

संजीवनी टुडे 26-05-2019 21:41:40


अयोध्या। रामवल्लभा कुंज के सभागार में विद्वत सम्मान समारोह का आयोजन भारतीय शिक्षण मंडल की अवध विश्वविद्यालय ईकाई की ओर से रविवार को किया गया। इस समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित को कुलगुरु रूप में सफलतापूर्वक दो वर्ष का कार्यकाल पूर्ण करने के फलस्वरुप संस्था की ओर से उन्हें  सम्मानित किया। इसके साथ ही गुरुकुल प्रकल्प में योगदान देने वाले विभिन्न विषयों के 51 आचार्यों को भी सम्मानित किया गया। 

इस समारोह के मुख्य अतिथि महात्मा गांधी केन्द्रीय मुक्त विश्वविद्यालय मोतिहारी, बिहार के कुलगुरु आचार्य संजीव शर्मा ने सभी आचार्यों को प्रशस्ति पत्र के साथ अंगवस्त्र भेंट कर उनका सम्मान किया। इस मौके पर उन्होंने अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दीक्षित की कार्यशैली और उनके दूरदर्शिता व परिश्रम की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। इसके साथ ही अपेक्षा की कि वह अपनी प्रतिभा और दक्षता का लाभ भविष्य में किसी केन्द्रीय विश्वविद्यालय को प्रदान करें। 

वहीं, समारोह के मुख्य वक्ता एवं संघ के प्रचारक व भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने कहा कि भारत में धन और विद्वता की कभी कमी ही नहीं रही। उन्होंने कहा कि तिरुपति बालाजी एवं सिद्धि विनायक की बात ही क्या करें अकेले केरल के पद्मनाभन् मंदिर के सोने से ही पूरी दुनिया को खरीदा जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज जीवन में कार्य करने वालों का आदर्श हनुमानजी है। जिनकी उद्घोषणा है कि ‘रामकाज कीन्हें बिन मोहिं कहां विश्राम'। संघ प्रचारक कानिटकर ने कहा कि विद्वानों को संगठन करना किसी भी संस्था के लिए बड़ी चुनौती है और भारतीय शिक्षण मंडल इस दायित्व का निर्वाह कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय शिक्षण मंडल का उद्देश्य नए गुरुकुलों की स्थापना और आधुनिक शिक्षा का गुरुकुलीकरण करना है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल प्राचीन शिक्षा पद्दति भले ही है लेकिन यह भविष्य की शिक्षा बनें, यही संकल्प लेकर जाएं तो समारोह का उद्देश्य सार्थक होगा।

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उन्होंने कहा कि भगवान राम की पूजा का भाव यह है कि उनके गुणों का हममें समावेश हो। उन्होंने कहा कि प्रभु राम को विग्रहवान धर्म माना गया है। इस अवसर पर रामवल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास व डॉ. एचबी सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस दौरान संस्कृत के विद्वान डॉ. तामेश्वर नाथ मिश्र, माणिकचंद मिश्र, डॉ. रामानंद शुक्ल, आचार्य रघुनाथ शास्त्री, रामकेश कुमार शुक्ल, डॉ. मनोज उपाध्याय व ज्ञान द्विवेदी सहित अन्य को सम्मानित किया गया। 

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