संजीवनी टुडे

भूस्खलन और अतिवृष्टि से 14 की मौत, 06 लापता, अलर्ट जारी

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 19-08-2019 19:09:03

भूस्खलन एवं बाढ़ की चपेट में आकर कम से कम 14 लोगों की मौत हो गयी तथा छह अन्य लापता हैं।


देहरादून। उत्तराखंड में भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं से हुए भूस्खलन एवं बाढ़ की चपेट में आकर कम से कम 14 लोगों की मौत हो गयी तथा छह अन्य लापता हैं। राज्य में सबसे गंभीर रूप से उत्तरकाशी जिले की मोरी तहसील हुअा जहां विभिन्न गांवों में भूस्खलन और अतिवृष्टि से हुई क्षति का अभी अनुमान नहीं लगाया जा सका है। साेमवार अपराह्न तक मोरी में 11 शव बरामद हो चुके हैं जबकि कुल छह लोग लापता हैं। केंद्रीय और राज्य स्तरीय बचाव दल बचाव तथा राहत कार्यों में अनवरत जुटे हैं।

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राज्य के आपदा विभाग के सचिव अमित नेगी ने संवाददाताओं को बताया कि आपदाग्रस्त क्षेत्र में अभी तक 11 शव बरामद किये जा चुके हैं। इनमें कुल सात शव देर रात्रि जबकि सुबह चार अन्य शव बरामद हुये हैं। उन्होंने बताया कि अत्यंत दुर्गम क्षेत्र होने तथा लगातार खराब मौसम के कारण राहत कार्यों में बाधा आ रही है। उन्होंने बताया कि आराकोट क्षेत्र में अभी तक कुल छह लोगों के लापता होने की पुष्टि हो चुकी है।

मृतकों में, आराकोट गांव की शोभा देवी (38), कालूराम (80), मूलनिवासी नेपाल, मास्टर कौशिक (10 माह), माकुड़ी गांव के चतर सिंह (50), कलावती (45), कला देवी (35) और रितिका (15) की मृत्यु की पुष्टि देर रात्रि हो चुकी थी। जबकि सोमवार सुबह एक अज्ञात सहित रणवीर सिंह पंवार (55) निवासी धनोल्टी, शोभना (26) निवासी माकुडी, के शव राहत दलों ने मलबे से खोज निकाले हैं। इसके अतिरिक्त, वीरेंद्र कुमार (55) निवासी बिजनौर (उत्तर प्रदेश), शालू (22), रामप्रसाद (65) निवासी ग्राम सनेल, मीणा देवी (34) निवासी सनेल, तिलक (31) (वाहन चालक) निवासी हिमाचल प्रदेश तथा कुंदन सिंह की पत्नी का तलाश जारी है। लापता लोगों में शामिल उत्तर प्रदेश के बिजनौर निवासी वीरेंद्र सिंह स्थानीय राजकीय इंटर कालेज के प्रवक्ता हैं। 

नेगी ने बताया कि आपदा से अभी तक 12 गांवों के प्रभावित होने की पुष्टि हो चुकी है। जबकि तीन गांवों से अभी तक सम्पर्क नहीं हो सका है। उन्होंने बताया कि वायुसेना के हेलीकॉप्टर द्वारा आराकोट में संचार संसाधन लगा दिए गए हैं। इससे अब इस क्षेत्र की अद्यतन सूचना मिल सकेगी। साथ ही, चार लोगों को उपचार के लिये देहरादून स्थित दून मेडिकल कालेज में लाया गया है।

उन्होंने बताया कि चार क्वंटल खाद्य सामग्री के अलावा, टैंट आदि राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। दुर्गम क्षेत्र में छोटे हैलीपेड बनाये जा रहे हैं। साथ ही, 10 टीम पैदल आपदाग्रस्त क्षेत्रों के लिये रविवार से ही भेज दी गईं हैं। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित होने के कारण वहां का प्रशासन भी राहत कार्य में मदद कर रहा है।

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आपदाग्रस्त आराकोट में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल और राज्यमंत्री धन सिंह रावत ने भी सोमवार को पहुंचकर राहत कार्यों का जायजा लिया है। दूसरी ओर, मौसम विभाग ने विशेष तौर पर कुमायूं मण्डल के विभिन्न स्थानों पर भारी बारिश की सम्भावना व्यक्त की है। इसके कारण शासन ने वहां अलर्ट जारी किया है।

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