संजीवनी टुडे

अस्पताल की फाइल में 10 डॉक्टर बिना बताए वर्षों से हैं गायब

संजीवनी टुडे 14-07-2019 15:14:33

अस्पताल की फाइल में 10 डॉक्टर बिना बताए वर्षों से हैं गायब


गोपालगंज। यहां का सदर अस्पताल बदहाली की मार झेल रहा है। यहां कुव्यवस्था साफ दिखती है। जिले की 26 लाख की आबादी पर यहां केवल 35 डॉक्टर बहाल हैं। उसमें भी यहां नियुक्त 10 डॉक्टर 7 वर्षों से बिना सूचना के गायब हैं । उनकी खोज खबर न विभाग ले रहा है न सिविल सर्जन। सदर अस्पताल में डॉक्टर की कमी का रोना बताकर अस्पताल उपाधीक्षक अपना पाला झाड़ लेते हैं । जब उनसे इन 10 डॉक्टरों के गायब रहने की बात पूछा जाता है तो वे विभाग से पूछने की बात करते हैं । 

इन गायब डॉक्टरों के विषय में जब तहकीकात की तो पता चला कि 2012 से ही डॉक्टर गायब मिले। इसकी जानकारी उपाधीक्षक को नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े को सही माना जाय तो सदर अस्पताल,रेफरल अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र,उप-स्वास्थ्य केन्द्र,अतिरिक्त स्वास्थ्य केन्द्र,सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में 241 डॉक्टरों की  जगह मात्र 35 डॉक्टर ही सेवा दे रहे हैं।

अस्पतालों में  मरीजों की  भीड़ के लिए इतने डॉक्टर पर्याप्त नहीं हैं । मरीजों को जो सेवा मिलनी चाहिए वह नहीं मिल रही  है। इसे  लेकर अस्पताल में हंगामा,तोड़फोड़ की घटनाएं होती  रहती हैं । अस्पताल लंबे समय से डॉक्टरों की कमी का दंश झेल रहा है। आलम यह है कि 10 ऐसे डॉक्टर हैं जो बिना बताये गायब हैं लेकिन, इनके  नाम अस्पताल की सूची में मौजूद हैं ।

गोपालगंज स्वास्थ्य विभाग में ये डॉक्टर पदस्थापित हैं , लेकिन विभाग को बिना  बताये पिछले कई वर्षों से गायब हैं  । डॉ असलम हुसैन 15 जनवरी 2015 से,डॉ शशिभूषण सिन्हा 6 नवंबर 2015 से,डॉ कामोद झा 22 जुलाई 2016 से,डॉ प्रभात कुमार नायक 7 अगस्त 2016 से,डॉ प्रियंका 17 जुलाई 2016 से,डॉ राखी सिंह 12 अगस्त 2013 से डॉअशोक कुमार 25 दिसम्बर 2016 से,डॉ मनवर आलम 1 जून 2016 से,डॉ संजू प्रसाद 26 जुलाई 2012 से,डॉ आमिर रेहान 29 अप्रैल 2016 से गायब हैं । 

सदर अस्पताल की बात की जाय तो यहां मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के नाम पर 24 डॉक्टर के पद स्वीकृत हैं लेकिन 10 डॉक्टर ही अपनी सेवा दे रहे हैं। इमरजेंसी वार्ड में तीन शिफ्ट में डॉक्टर की तैनाती की जाती है जिसमें सुबह 8 बजे से 2 बजे तक, 2 बजे से रात्रि 12 बजे तक और रात्रि 12 बजे से सुबह 8 बजे तक डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हैं। लेकिन सच्चाई है कि रात के समय इमरजेंसी वार्ड में शायद ही कोई डॉक्टर ड्यूटी करते हों । 

अगर किसी कारण से  कोई डॉक्टर रात में रुक भी गया तो वह इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टर के लिए बने कक्ष में सोये पाए जाते हैं । सदर अस्पताल में नवजात शिशु रोग वार्ड के संचालन के लिए एक भी विभागीय डॉक्टर नहीं है जिसके  कारण मासूमों के परिजन अपने बच्चों को लेकर प्राइवेट क्लिनिक  का  रुख कर रहे हैं। यहां डॉक्टर का अभाव होने के कारण अधिकांश मरीज को पटना और गोरखपुर रेफर कर दिया जाता है। 

विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में सामान्य डॉक्टर ही नवजात शिशु का इलाज करते हैं । संविदा पर कार्यरत डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ के 8 पद हैं  लेकिन, एक भी सरकारी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। इसी प्रकार मानसिक रोग विशेषज्ञ का एक पद है, वह भी खाली है। चर्म रोग विशेषज्ञ के दो पद भी खाली हैं। ईएनटी के 2 और रेडियोलॉजिस्ट के 5 पद भी खाली हैं । 

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक पीसी प्रभात ने बताया कि मरीजों की संख्या दिन ब दिन बढ़ रही है। डॉक्टर की कमी है। विभाग को चिकित्सकों की  पदस्थापना के लिए कई बार पत्र सिविल सर्जन स्तर से भेजा गया है। उसने बताया कि सही में 10 चिकित्सक बिना छुट्टी के गायब हैं । उनकी जानकारी मुझे नहीं है। वैसे विभाग को इस संबंध में सूचित कर दिया गया है।

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