संजीवनी टुडे

टीम इंडिया के गेम चेंजर पांड्या और धोनी

मनोज चतुर्वेदी

संजीवनी टुडे 23-05-2019 08:25:55


इंग्लैंड और वेल्स में 30 मई से दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट मेला यानी विश्व कप शुरू होने जा रहा है। टीम इंडिया विराट कोहली की अगुआई में इसमें भाग लेने के लिए इंग्लैंड पहुंच गई है। विराट कोहली ने रवानगी से पहले कहा कि इस विश्व कप में परिस्थितियों से ज्यादा दबाव से निपटना महत्वपूर्ण होगा। विराट और उनकी टीम को देशवासियों का क्रिकेट से दीवानगी की हद तक प्यार करने की वजह से बेहतर प्रदर्शन का भी दबाव रहेगा। इसके अलावा चैंपियन बनने के लिए मेजबान इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों से भी निपटना होगा। यह काम कतई आसान नहीं है। वैसे तो इस बार के फॉर्मेट में भाग लेने वाली सभी टीमों को एक-दूसरे से खेलना है। इसलिए प्रदर्शन में एकरूपता रखना भी बेहद जरूरी होगा। इस सबके अलावा टीम इंडिया के तीन गेम चेंजर खिलाड़ियों - हार्दिक पांड्या, महेंद्र सिंह धोनी और जसप्रीत बुमराह का चलना चैंपियन बनने के लिए बेहद जरूरी है।

यह सही है कि टीम की बल्लेबाजी पहले तीन बल्लेबाजों रोहित शर्मा, शिखर धवन और कप्तान विराट कोहली पर निर्भर है। यह तीनों ही बल्लेबाज अनुभवी हैं और दुनिया की सभी टीमों के खिलाफ समय-समय पर जलवा बिखेरते रहे हैं। लेकिन इन तीनों के अलावा जब तक मैचों में बल्लेबाजी में पांड्या और धोनी का तड़का नहीं लगेगा, जीत पाना आसान नहीं होगा। हार्दिक पांड्या के बारे में 2011 में भारत के विश्व कप जीतने के दौरान मैन ऑफ द सीरीज बने युवराज सिंह का कहना है कि इस विश्व कप में हार्दिक पांड्या का खेल देखने लायक होगा। वैसे भी इंग्लैंड में इस सीजन में विकेट सपाट मिलेंगे। इसलिए इन पर हार्दिक पांड्या की पॉवर हिटिंग चल गई, तो स्थितियां भारत के लिए आसान हो जाएंगी। पांड्या सिर्फ विस्फोटक बल्लेबाज ही नहीं बल्कि अच्छे पेस गेंदबाज भी हैं। उन्होंने पिछले कुछ समय में अपनी गेंदबाजी में बहुत सुधार किया है। इसलिए कप्तान उनके ऊपर टीम के तीसरे या चौथे पेस गेंदबाज के तौर पर भरोसा कर सकते हैं और 6-7 ओवर गेंदबाजी कराई जा सकती। यही नहीं वह जबर्दस्त फील्डर भी हैं। बहुमुखी प्रतिभा वाले हार्दिक की सफलता टीम इंडिया की सफलता के लिए बहुत जरूरी है।

टीम इंडिया के दूसरे गेम चेंजर निश्चय ही महेंद्र सिंह धोनी हैं। धोनी इस विश्व कप में कप्तान विराट को सलाह देने वाले ही नहीं बल्कि एक विकेटकीपर और बल्लेबाज के तौर पर भी जलवा बिखेरने वाले हैं। एक समय था, जब धोनी के इस विश्व कप खेलने की इच्छा जाहिर करने पर कुछ लोगों को लगता था कि वह ऋषभ पंत जैसे युवा विकेटकीपरों का मौका मार रहे हैं। इसकी वजह उनका बल्लेबाजी में नहीं चलना था। लेकिन एक बात अच्छी थी कि वह लगातार ठीक विकेटकीपिंग कर रहे थे। आईपीएल के मौजूदा सत्र में धोनी ने जिस तरह से बल्लेबाजी की है, उसने उनके आलोचकों को भी उनका मुरीद बना दिया है। अब सभी को लगता है कि वह अपने विस्फोटक अंदाज से टीम इंडिया को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री का धोनी के बारे में कहना है कि वह विकेटकीपिंग में अच्छे कैच पकड़ने वाले ही नहीं बल्कि स्टंप्स और रन आउट करने में भी महारत रखते हैं। आईपीएल के पिछले सत्र में वह अच्छे फुटवर्क से बल्लेबाजी करते नजर आए और उनकी पॉवर हिटिंग ने तो सभी का मन मोह लिया। इन खूबियों के साथ वह विश्व कप में गेम चेंजर साबित हो सकते हैं।

जसप्रीत बुमराह को भारतीय गेंदबाजी अटैक की जान माना जाता है। बुमराह ने विकेट निकालने की क्षमता के कारण अपनी धाक जमाई है। वह अपनी गति से कई बार बल्लेबाज को परेशान करने में सफल हो जाते हैं। बुमराह बहुत ही कसी गेंदबाजी करने की वजह से सामने वाले बल्लेबाजों पर दवाब बनाने में सफल हो जाते हैं। बुमराह ने अब तक खेले 49 वनडे मैचों में 4.51 की इकॉनमी रेट से 85 विकेट निकाले हैं। टीम इंडिया का बिना बुमराह की सफलता के विश्व कप जीतने का सपना साकार होना संभव नहीं है। यही वजह है कि वह विराट के बहुत ही भरोसेमंद गेंदबाज हैं और समय-समय पर कप्तान की चाहत पर खरे उतरते रहे हैं।

ऐसा नहीं है कि भारत के पास ही गेम चेंजर खिलाड़ी हैं। इंग्लैंड ऐसी टीम है, जिसे भारत से भी ज्यादा खिताब जीतने का दावेदार माना जा रहा है। इस टीम के पास जोफ्रा आर्चर, जोस बटलर, बेयरेस्टो और बेन स्टोक्स के रूप में ऐसे क्रिकेटर हैं, जो अकेले दम मैच का नक्शा बदलने की क्षमता रखते हैं। बारबाडोस में जन्मे जोफ्रा आर्चर को टीम में शामिल करने के लिए उनके इंग्लैंड के लिए खेलने की पात्रता के लिए निर्धारित अवधि को कम किया गया है। जोफ्रा ने आईपीएल के पिछले सत्र में अपनी धाकड़ बल्लेबाजी और 150 किमी. तक की रफ्तार वाली गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया। वह इस विश्व कप में इंग्लैंड के तुरुप के इक्के साबित हो सकते हैं। हालांकि सही मायनों में इंग्लैंड के तुरुप के इक्के तो जोस बटलर ही हैं। वह जिस विस्फोटक अंदाज में बल्लेबाजी करते हैं, उससे विपक्षी गेंदबाजों की शामत आना तय है। बटलर ने पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज के दूसरे वनडे में 50 गेंद में शतक ठोंककर दिखाया है कि वह इस विश्व कप में क्या करने जा रहे हैं। बटलर की तरह ही बेयरेस्टो भी आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करने वाले हैं। बेन स्टोक्स को इस समय दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में शुमार किए जाते हैं। वह जितनी आक्रामक बल्लेबाजी करते हैं, उतनी ही अच्छी गेंदबाजी करने में भी माहिर हैं। इसके अलावा इंग्लैंड को घर में खेलने का फायदा मिलना भी तय है। इससे खिताब की पहली दावेदार तो वही लगती है।

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हम यदि आस्ट्रेलिया के गेम चेंजर की बात करें तो डेविड वार्नर इस भूमिका में बखूबी नजर आते हैं। डेविड वार्नर ने एक साल के प्रतिबंध के बाद लौटने पर पिछले दिनों आईपीएल में जिस तरह अपनी बल्लेबाजी के झंडे गाड़े, उससे लगता है कि वह विश्व कप में भी डंका बजाने वाले हैं। उन्होंने मात्र 12 मैचों में एक शतक और आठ अर्धशतकों से 692 रन बनाकर ऑरेंज कैप पर कब्जा जमाया। हम यदि वेस्टइंडीज के क्रिस गेल और आंद्रे रसेल की बात नहीं करें तो इन दोनों के साथ ज्यादती होगी। सही मायनों में यह दोनों जबर्दस्त गेम चेंजर हैं। इन दोनों से ज्यादा विस्फोटक अंदाज से बल्लेबाजी करने वाले कम ही हैं। इनकी दिक्कत यह है कि इनकी टीम एकजुट होकर प्रदर्शन नहीं कर पाती है। हां, इतना जरूर है कि वेस्टइंडीज एकजुट होकर खेलती दिखी तो उसके यह दोनों गेम चेंजर कई टीमों का समीकरण बिगाड़ सकते हैं।

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