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सुरेश रैना ने किया बड़ा खुलासा, बताया- विश्वकप में आउट होने पर दिखा धोनी का उदास चेहरा तो मन ही मन बना लिया था यह प्लान

संजीवनी टुडे 01-06-2020 13:58:45

इस दौरान रैना ने बताया कि किस तरह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वॉर्टर फाइनल मैच में धोनी के उदास चेहरे ने उन्हें प्रेरित किया था।


डेस्क। कोरोना वायरस महामारी की वजह से चल रहे देशव्यापी लॉकडाउन के बीच सभी खिलाड़ी अपनी फैमिली के साथ घर में वक्त बिता रहे हैं, लेकिन वे सोशल मीडिया के जरिए अपने फैन्स से भी जुड़े हुए हैं और कई यादगार किस्से भी शेयर कर रहे हैं। इसी बीच भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना ने सोशल मीडिया पर आकाश चोपड़ा से बातचीत में टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से जुड़ी एक बात का खुलासा किया है।  

इस दौरान रैना ने बताया कि किस तरह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वॉर्टर फाइनल मैच में धोनी के उदास चेहरे ने उन्हें प्रेरित किया था। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच  2011 विश्व कप का दूसरे क्वार्टर फाइनल अहमदाबाद में खेल गया था। इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने 118 गेंदों में शानदार 104 रनों की पारी खेली थी। 

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पोंटिंग की इस शानदार पारी के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने स्कोर बोर्ड पर 260 रनों का स्कोर टांग दिया था। इस टारगेट का पीछा करते हुए भारतीय टीम वीरेंद्र सहवाग का विकेट सस्ते में खो चुकी थी। इसके बाद सचिन तेंदुलकर (53) और गौतम गंभीर (50) ने टीम को संभलने में मदद की। 

इस पारी में दोनों खिलाड़ियों के बीच दूसरे विकेट के लिए 50 रन की पार्टनरशिपर हुई। इसके बाद विराट कोहली (24) ने गंभीर के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 49 रन जोड़े। भारत ने इस मैच में अपने विकेट जल्दी-जल्दी गंवाए। 38 ओवर में भारत का स्कोर 5 विकेट के नुकसान पर 187 रन था। 

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धोनी के उदास चेहरे से मिली प्रेरणा-
आकाश चोपड़ा के साथ बातचीत में सुरेश रैना ने बताया कि धोनी आउट होने के बाद काफी उदास हो गए थे। उनके दुखी चेहरे और सचिन तेंदुलकर के प्रेरित करने वाले शब्दों ने उन्हें भारत के लिए जीत हासिल करने की प्रेरणा दी। 

रैना ने बताया, 'वीरेंद्र सहवाग मेरी दाईं और सचिन तेंदुलकर बाईं तरफ बैठे हुए थे। सचिन ने मेरी पीठ थपथपाई और कहा आज भारत के लिए तुम मैच जीत सकते हो। उन्होंने मुझे तीन बार छुआ और फिर पहने हुए साईं बाबा के ब्रेसलेट को छुआ। इसके बाद सचिन तेंदुलकर से मिले आशीर्वाद ने मुझे अहसास दिलाया कि आज मैं यह मैच भारत के लिए जीत सकता हूं।' 

रैना ने आगे बताया, 'जब मैं बल्लेबाजी के लिए जा रहा था, तब धोनी आउट होकर पवेलियन को लौट रहे थे। मैंने उनका उदास चेहरा देखा और उसी पल मैंने फैसला कर लिया। मैं इस मौके को नहीं गंवाऊंगा और किसी भी कीमत पर इस मैच को जीतूंगा। ऑस्ट्रेलिया ने आक्रमण से ऑफ स्पिनरों को हटा दिया और वे हमारे लिए एकमात्र खतरा थे। जब मैंने ब्रेट ली की गेंद पर छक्का मारा, उसके बाद मुझे जीत का यकीन हो गया और यही बात हमारे फेवर में रही।'

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इस मैच में भारतीय टीम को जीत के लिए 75 गेंदों में 74 रनों की जरूरत थी। इस मैच में रैना ने 28 गेंदों में युवराज सिंह के साथ मिलकर 34 रनों की तेज तर्रार पारी खेली। युवराज सिंह के शानदार 57 रनों और रैना की तेज पारी के दम पर भारत ने इस मैच में जीत हासिल की थी। 

भारत ने इस मैच में 14 गेंदें शेष रहते भारत ने 5 विकेट से जीत हासिल की थी। इस जीत के बाद भारत ने वर्ल्ड कप 2011 के सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली थी। सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला पाकिस्तान के साथ हुआ। पाकिस्तान को मात देकर भारत ने फाइनल में अपनी जगह बनाई। फाइनल मैच में श्रीलंका को हराकर भारत ने 28 साल बाद एक बार फिर से विश्कप खिताब अपने नाम किया। इस तरह यह क्रिकेट के इतिहास का सबसे रोमांचक और यादगार मैच बन गया।  

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