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IND vs WI Series: आईसीसी ने मैदानी अंपायर से छीना एक बड़ा अधिकार, लागू किया यह नया नियम

संजीवनी टुडे 06-12-2019 11:34:22

पहली बार इंग्लैंड-पाकिस्तान के बीच 2016 में हुई वनडे सीरीज में इसका ट्रायल हुआ था।


डेस्क। भारत-वेस्टइंडीज के बीच 6 दिसंबर से तीन मैचों की टी-20 और इतने ही मैचों की वनडे सीरीज शुरू हो रही है। पहला मैच शुक्रवार को हैदराबाद में खेला जाएगा। इससे पहले गुरुवार को आईसीसी ने एक बड़ी घोषणा की है। आईसीसी के नए नियम के मुताबिक भारत-वेस्टइंडीज सीरीज में फ्रंट फुट नो बॉल का फैसला मैदानी अंपायर की बजाय थर्ड अंपायर करेगा। 

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आईसीसी के नए नियम को ट्रायल के तौर पर लागू किया जा रहा है। अगर यह सफल रहता है तो फिर बॉलिंग के दौरान फ्रंटफुट नो बॉल का फैसला थर्ड अंपायर करेगा। इसका ये मतलब है कि फील्ड अंपायर तीसरे अंपायर की सहमति के बिन नो बॉल पर अपना फैसला नहीं देगा। आइसीसी की तरफ से कहा गया है कि यहां पर बेनेफिट ऑफ डाउट का फायदा गेंदबाज को ही मिलेगा।

मैदानी अंपायर

इस बारे में आईसीसी ने कहा, ‘‘ट्रायल के दौरान थर्ड अंपायर हर गेंद पर निगरानी रखने और यह पहचानने का जिम्मेदार होगा कि क्या फ्रंट फुट का उल्लंघन हुआ है। अगर उसे ऐसा लगता है तो वह (थर्ड अंपायर) मैदानी अंपायर को इसकी जानकारी देगा। ताकि वह (ऑन फील्ड अंपायर) इसे नो बॉल करार दे सके। इसका मतलब मैदानी अंपायर बिना थर्ड अंपायर की सलाह के पैर की नो बॉल नहीं दे सकेगा।’’

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साथ ही आईसीसी ने कहा कि करीबी फैसलों में संदेह का लाभ गेंदबाज को मिलेगा। आईसीसी ने कहा, ‘और अगर नोबॉल पर फैसला बाद में बताया जाता है तो मैदानी अंपायर आउट (अगर लागू होता है) के फैसले को रोक देगा और नोबॉल करार दे देगा। मैच के दौरान के अन्य फैसलों के लिए सामान्य की तरह मैदानी अंपायर जिम्मेदार होगा।’

मैदानी अंपायर

इसके अनुसार, ‘ट्रायल के नतीजे का इस्तेमाल यह निर्धारित करने के लिए होगा कि इस प्रणाली का नोबॉल संबंधित फैसलों की सटीकता पर लाभदायक असर होता है या नहीं और क्या इसे खेल के प्रवाह में कम से कम बाधा पहुंचाए बिना लागू किया जा सकता है या नहीं।’

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आईसीसी के मुताबिक, 'अगर सामने के पैर में कोई उल्लंघन हुआ है, तो थर्ड अंपायर ऑन-फील्ड अंपायर से बातचीत करेगा, जिसे बाद में नो बॉल करार कर दिया जाएगा।' आईसीसी ने कहा कि करीबी कॉल में संदेह का लाभ गेंदबाज के पास होगा।

मैदानी अंपायर

आईसीसी ने आगे कहा है, 'अगर फैसला देने में देरी होती है, तब मैदान पर मौजूद अंपायर आउट का फैसला बदलेगा (अगर उचित हो) और नॉ बॉल करार देगा। बाकी सभी फैसलों के लिए पहले की तरह मैदानी अंपायर ही जिम्मेदार होगा।'

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आईसीसी के मुताबिक, ट्रायल के नतीजों से यह पता लगाया जाएगा कि इस बदलाव का नो बॉल से जुड़े फैसलों की सटीकता पर कितना असर पड़ा है। इसके अलावा यह भी जांचा जाएगा कि पैर की नो बॉल से जुड़े नए नियम को खेल में बाधा पहुंचाए बिना लागू किया जा सकता है या नहीं। पहली बार इंग्लैंड-पाकिस्तान के बीच 2016 में हुई वनडे सीरीज में इसका ट्रायल हुआ था। 

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