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VIDEO: क्रिकेट को भी तबाह कर सकता है जलवायु परिवर्तन, जानिए कैसे?

संजीवनी टुडे 11-09-2019 02:03:00

जलवायु परिवर्तन दुनिया के दूसरे सर्वाधिक लोकप्रिय खेल क्रिकेट को भी तबाह कर सकता है।


डेस्क। अमेजन के वर्षा वनों में लगी आग से हम भारतीय भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते है। इतना ही नहीं इसका प्रभाव पूरी दुनिया की जलवायु पर देखने को मिल सकता है। इसकी वजह से जलवायु परिवर्तन होने की पूरी संभावनाएं देखी जा सकती है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन दुनिया के दूसरे सर्वाधिक लोकप्रिय खेल क्रिकेट को भी तबाह कर सकता है। 

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जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचने के लिए आने वाले समय में क्रिकेट के स्वरूप में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ विराट कोहली जैसे बल्लेबाज और महेंद्र सिंह धोनी जैसे विकेटकीपर भविष्य में तैयार नहीं हो पाएंगे।

जलवायु परिवर्तन खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बिगाड़ देगा। बढ़ती गर्मी और नमी उनकी चुस्ती-फुर्ती को खत्म कर देगी। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में क्रिकेटर शॉट्स पहनकर मैदान में दिखेंगे।

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जलवायु परिवर्तन पर क्रिकेट के प्रभावों को लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स एवं पोर्ट्समाउथ की रिपोर्ट ‘हिट पर सिक्स' मंगलवार को जारी होने जा रही है। यह इस किस्म की पहली रिपोर्ट है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रिकेट में धूप, तापमान, बारिश और जमीन सबकी भूमिका होती है और इन सब पर ग्लोबल वार्मिंग का खतरा मंडरा रहा है, इसलिए क्रिकेट के खेल और खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी इसका सर्वाधिक असर होगा। 

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि क्रिकेट खेलने के लिए 33-35 डिग्री का तापमान आदर्श होता है। यह शरीर के भीतर के तापमान से थोड़ा ही कम है। तापमान इससे ज्यादा की बढ़ोत्तरी खिलाड़ियों की सेहत के लिए ठीक नहीं। खासकर तब जब हवा में नमी का स्तर 30 फीसदी या इससे ज्यादा हो।

इन दो कारणों के साथ-साथ गर्मी की तीव्रता ज्यादा होने, गर्म हवाएं चलने से यह खतरा गंभीर रूप धारण कर रहा है। 40 डिग्री से ज्यादा तापमान में खेलना खिलाड़ियों के लिए घातक साबित हो सकता है।

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इसके संभावित दुष्परिणाम-
फिटनेस- जलवायु परिवर्तन का असर सिर्फ खेल पर ही नहीं बल्कि खिलाड़ियों पर भी हो रहा है। तापमान के बढ़ने से क्रिकेटरों के लिए खुद को फिट रखना कठिन हो रहा है।

पिच और मैदान पर असर- बढ़ती गर्मी, लू, बारिश, बड़े तूफान आदि के चलते भविष्य में मैचों को बार-बार स्थगित करना पड़ेगा। सूखे के कारण खेल के मैदानों से घास गायब हो जाएगी।

मांसपेशियों पर असर- खेलते वक्त अक्सर शरीर में पानी की कमी की वजह से यह समस्या होती है। इसके अलावा इलेक्ट्रोलेट संयोजन में बदलाव से भी यह दिक्कत होती है।
 
उपरोक्त कारणों से खिलाड़ियों पर कई तरह के घातक प्रभाव हो सकते हैं। उनकी खेलने की क्षमता प्रभावित होती है। यदि 40 डिग्री तापमान में वे क्रिकेट खेलते हैं तो गर्मी से दबाव और हीट स्ट्रोक जैसे खतरे भी हो सकते हैं। खिलाड़ियों के दिल पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका है।

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