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B'day Spl: अश्विन का इस चैम्पियंस ट्रॉफी से शुरू हुआ था बुरा दौर, फिर ऐसे पाई सफलता

संजीवनी टुडे 17-09-2019 16:31:22

अश्विन फिलहाल सीमित ओवरों के प्रारूप की भारतीय टीम से बाहर हैं।


नई दिल्ली। टीम इंडिया के स्टार ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन आज (मंगलवार) को अपना 33 वां जन्मदिन मना रहे है। उनका जन्म 17 सितंबर 1986 को मद्रास (अब चेन्नई) में हुआ था। चेन्नई की गलियों से निकले इस 'फिरकी' गेंदबाज ने विश्व क्रिकेट में ऐसी धूम मचाई कि बड़े से बड़े बल्लेबाज पस्त होते दिखे।

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अश्विन फिलहाल सीमित ओवरों के प्रारूप की भारतीय टीम से बाहर हैं। उन्हें एक तरफ बाएं हाथ के स्पिनर रवींद्र जडेजा से कड़ी टक्कर मिल रही है, तो दूसरी तरफ कलाई के स्पिनरों की जोड़ी- युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव ने चयनकर्ताओं का भरोसा जीता। और अब नवोदित ऑफ स्पिनर वॉशिंगटन सुंदर और लेग स्पिनर राहुल चाहर को कप्तान विराट कोहली आजमाना चाहते हैं। 

अश्विन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मौजूदा टेस्ट सीरीज के 15 सदस्यीय भारतीय स्क्वॉड में शामिल हैं। लेकिन यह तय नहीं है कि उन्हें 2 अक्टूबर से शुरू हो रही टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया के अंतिम-11 खिलाड़ियों में मौका मिलेगा या नहीं। 

अश्विन लगातार पांच टेस्ट से बाहर है। आखिरी बार ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पहले मैच में खेले थे। दिसंबर में एडिलेड टेस्ट में कुल छह विकेट (3 3) लेने के बाद मैच की चौथी सुबह चोटिल हो गए। बाईं तरफ पेट में खिंचाव के वजह से वह इसके बाद पर्थ और मेलबर्न टेस्ट में भी नहीं खेल पाए। सिडनी में होने वाले अंतिम टेस्ट के लिए 13 खिलाड़ियों में भी उनका नाम रहा, पर उन्हें नहीं खिलाया गया।  इसके बाद वेस्टइंडीज दौरे में भी वह दोनों टेस्ट से बाहर रहे। 

चैम्पियंस ट्रॉफी-2017 की नाकामी ने छीन ली जगह!

दरअसल, चैम्पियंस ट्रॉफी-2017 में अश्विन और रवींद्र जडेजा की स्पिन जोड़ी कोई कमाल नहीं दिखा पाई थी। अश्विन उस टूर्नामेंट के दौरान तीन मैचों में सिर्फ एक विकेट ले पाए थे। और तो और फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ दोनों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। दोनों ने 18 ओवरों में 137 रन दिए और एक भी विकेट नहीं मिला। इसके बाद से अश्विन को बुरा दौर शुरू हो गया, जबकि अश्विन वापसी करने में कामयाब रहे। 

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जून 2010 में पहले तो वनडे में मौका मिला और उसके बाद नवंबर 2011 में टेस्ट क्रिकेट में भी डेब्यू कर लिया। अश्विन 2011 वर्ल्ड कप विजेता भारतीय स्क्वॉड में शामिल रहे, लेकिन हरभजन सिंह के रहते उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले, लेकिन अश्विन ने अपनी गेंदबाजी पर लगातार मेहनत की। आखिरकार हरभजन के प्रदर्शन के गिरते ग्राफ ने अश्विन को तवज्जो दिला दी।

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