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एश्वेल प्रिंस का खुलासा, ऑस्ट्रेलिया में कई खिलाड़ियों को करना पड़ा था नस्लीय दुर्व्यवहार का सामना

संजीवनी टुडे 11-07-2020 15:11:20

पूर्व बल्लेबाज एश्वेल प्रिंस ने दावा किया है कि 2005 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर दक्षिण अफ्रीका के कई खिलाड़ियों के साथ नस्लीय दुर्व्यवहार किया गया था और टीम नेतृत्व ने उनसे लगातार खेलना जारी रखने का आग्रह किया था।


नई दिल्ली। पूर्व बल्लेबाज एश्वेल प्रिंस ने दावा किया है कि 2005 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर दक्षिण अफ्रीका के कई खिलाड़ियों के साथ नस्लीय दुर्व्यवहार किया गया था और टीम नेतृत्व ने उनसे लगातार खेलना जारी रखने का आग्रह किया था।

प्रिंस ने एक ट्वीट में कहा, "कुछ प्रोटियाज़ प्रशंसकों ने इस सप्ताह सोशल मीडिया पर जो कुछ भी पढ़ा है, उससे वे हैरान और निराश हो सकते हैं। सच कहा जाए, तो कम से कम 10 साल जो मैंने वहां बिताए हैं, उसके लिए कभी भी कोई संभावना नहीं थी! ऑस्ट्रेलिया वर्ष 2005! हम में से कई खिलाड़ियों ने मैदान पर बाउंड्री के पास नस्लवादी टिप्पणी का का सामना किया है।" ।

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, “कुछ समय से दक्षिण अफ्रीका में समाज और खेल दोनों में सिस्टम टूट गया है। हम अलगाव से लौटते हैं और हम दुनिया से कहते हैं, हमें देखो, हम वापस आ गए हैं, ओह, वैसे, अभी भी कई काले लोग हैं जो खेल नहीं सकते हैं, लेकिन हम साथ हैं।"

प्रिंस ने जिस घटना का उल्लेख किया है वह वर्ष 2005 में दक्षिण अफ्रीका के ऑस्ट्रेलियाई दौरे के पहले टेस्ट के दौरान पर्थ में घटी थी। प्रिंस, मखाया नतिनी और गार्नेट क्रुगर को भीड़ द्वारा नस्लीय टिप्पणी का सामना करना पड़ा था। उस समय, क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (सीएसए) प्रबंधन ने इसकी आईसीसी के मैच रेफरी क्रिस ब्रॉड से एक आधिकारिक शिकायत की थी।

प्रिंस ने ट्वीट किया, खिलाड़ियों की चिंताओं को खारिज कर दिया गया था। जब हमने लंच के समय इस घटना की जानकारी टीम नेतृत्व को दिया, तो हमें बताया गया," यह भीड़ में शामिल कुछ लोग ही हैं, इसलिए इसकी चिंता न करें।"

बता दें कि गुरुवार को क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका ने एक बयान जारी कर ब्लैक लाइव्स मैटर अभियान के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया था।

क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (सीएसए) के कार्यकारी अधिकारी जैक्स फॉल ने एक बयान में कहा था कि उनका बोर्ड 'ब्लैक लाइव्स मैटर' (बीएलएम) अभियान के साथ एकजुटता से खड़ा है और वह इस भेदभाव के खिलाफ लोगों को शिक्षित करने के लिए अपने सभी मंचों का उपयोग करेगा। एक मीडिया बयान में सीएसए ने कहा कि बोर्ड की स्थापना गैर-नस्लवाद और समावेश के सिद्धांतों पर की गई थी।

बयान के मुताबिक कि सीएसए का लक्ष्य सही मायने में विजेताओं का राष्ट्रीय खेल बनने की है जिसे बहुमत का समर्थन प्राप्त हो और 'ब्लैक लाइव्स मैटर' से जुड़ाव रखता हो। इसे समझना इतना ही आसान है। फॉल ने कहा कि साढ़े पांच करोड़ से अधिक दक्षिण अफ्रीकी लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक राष्ट्रीय खेल निकाय के रूप में यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी आवाज का उपयोग सभी प्रकार के भेदभाव वाले विषयों पर शिक्षित करने लिए करें।

बुधवार को इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के क्रिकेटरों ने नस्लवाद के खिलाफ अपनी एकजुटता दिखाने के लिए घुटने टेक दिए थे और एजेस बाउल में तीन मैचों की श्रृंखला के पहले टेस्ट की शुरुआत से पहले 'ब्लैक लाइव्स मैटर' आंदोलन का समर्थन किया था।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में श्वेत पुलिस अधिकारी की बर्बरता से अफ्रीकी-अमेरिकी मूल के व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद 'ब्लैक लाइव्स मैटर' आंदोलन ने दुनियाभर में गति पकड़ी। दुनियाभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच माइकल होल्डिंग, जेसन होल्डर, डैरेन सैमी जैसे क्रिकेटरों ने भी खुद के साथ हुए भेदभाव के अनुभवों को साझा किया था।

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