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आखिर कौनसा काम है जिसके लिए कोई भी बल्लेबाज आगे नहीं आना चाहता, गांगुली ने किया खुलासा

संजीवनी टुडे 03-12-2019 08:02:39

एजीएम में टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कई अहम फैसलों पर मोहर लगाई।


डेस्क। रविवार को हुई बीसीसीआई की एजीएम में टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कई अहम फैसलों पर मोहर लगाई। इसी बीच गांगुली ने यह भी माना कि बीसीसीआई संविधान के क्लॉज 38 के चलते देश का कोई भी पूर्व क्रिकेटर बोर्ड में मानद आधार पर सेवाएं नहीं देना चाहता। 

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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सौरव गांगुली का मानना है कि बीसीसीआई संविधान के क्लॉज 38 के चलते देश का कोई भी पूर्व क्रिकेटर बोर्ड में मानद आधार पर सेवाएं नहीं देना चाहता। दरअसल, जब सुप्रीम कोर्ट ने साल 2015-16 में सबसे पहले बीसीसीआई से जुड़े इस मामले की सुनवाई शुरू की थी, तो सबसे बड़ी चिंता यही थी कि पूर्व क्रिकेटर क्रिकेट प्रशासन का हिस्सा नहीं हैं।  

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लेकिन सौरव गांगुली की अगुआई वाली बीसीसीआई का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्रशासकों की समिति द्वारा शामिल किया गया क्लॉज पूर्व क्रिकेटरों को प्रशासन में शामिल करने के विचार के बिल्कुल विपरीत है। 

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गांगुली के अनुसार, 'हितों के टकराव संबंधी नियम का कोई मतलब नहीं है। इसे बदलना ही चाहिए। मैंने पहले भी ऐसा कहा है।' उदाहरण के तौर पर, 'मान ली‌जिए कि राष्ट्रीय चयनकर्ता का भतीजा टीम इंडिया के लिए खेल रहा है तो चयनकर्ता को हितों के टकराव के दायरे में माना जाएगा। लेकिन अगर चयनकर्ता के दोस्त का बेटा जो चयनकर्ता के अपने भतीजे से ज्यादा करीब हो, वो टीम इंडिया के लिए खेल रहा हो तब क्या होगा? ऐसे में कौन ये अनुमान लगा सकता है कि ये हितों के टकराव का मामला नहीं है।' 

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क्रिकेट सलाहकार समिति के बारे में सौरव गांगुली ने कहा, 'सीएसी (CAC) के पास ज्यादा काम नहीं है। हम लगातार इसके बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन सीएसी का काम चयनकर्ता और कोच की नियुक्ति करने का है। ऐसे में जब आप चयन समिति नियुक्त कर देते हैं तो ये चार साल तक चलती है। कोच नियुक्त होने के बाद तीन साल का कार्यकाल होता है। ऐसे में फुल टाइम सीएसी की क्या जरूरत है। कुछ दिन इंतजार करते हैं। हम सीएसी बनाएंगे।' 

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गांगुली ने कहा, 'मैं हितों के टकराव मामले पर एथिक्स ऑफिसर डीके जैन से मिल चुका हूं। हम किसी व्यक्ति को नियुक्त नहीं करना चाहते जिसकी नियुक्ति खारिज कर दी जाए। हम पहले डीके जैन से बिल्कुल स्पष्ट रुख हासिल करना चाहते हैं कि क्या हितों का टकराव है और क्या नहीं।'

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बता दें कि हितों के टकराव संबंधी नियम के चलते ही बीसीसीआई क्रिकेट सलाहकार समिति का गठन नहीं कर पा रही है। कोई भी पूर्व क्रिकेटर इस समिति का हिस्सा बनने के लिए आगे नहीं आ रहा है, क्योंकि चयनकर्ताओं की नियुक्ति के बाद अगले दो साल तक उसके पास करने के लिए कुछ काम नहीं होगा।

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