संजीवनी टुडे

सपने में भी कांपता था अकबर इस भारतीय योद्धा के नाम से ...

संजीवनी टुडे 30-11-2016 11:53:08

Akbar was trembling in dreams in the name of the Indian warrior

नई दिल्ली। यूं तो हिंदुस्‍तान की सरजमीं पर एक से एक जाबांज योद्धा, और रणबांकुरे हुए, जिन्‍होंने अपनी तलवार के बल पर बाहरी आक्रांताओं, विदेशी शत्रुओं से अपनी मातृभूमि की रक्षा की। मुगलों सहित विदेशियों के सत्‍ता विस्‍तार को रोकने में अपनी वीरता और हिम्‍मत का बेहद साहसी परिचय दिया। फिर चाहे वह पृथ्‍वीराज चौहान हो, शिवाजी हो, राणा कुंभा हो या महाराणा प्रताप। लेकिन इन सभी योद्धाओं के बीच महाराणा प्रताप एक ऐसा नाम रहा, जिसकी वीरता, साहस और रणभूमि में बेहतरीन जंग के किस्‍से पूरे देश में ही नहीं, बल्‍कि उस दौर में भी पूरी दुनिया में चर्चित रहे जबकि प्रताप की वीरता आज भी पूरी दुनिया में मानी जाती है. भारत के इतिहास में महाराणा प्रताप एकमात्र ऐसे योद्धा रहे, जिन्‍होंने कभी किसी मुगल बादशाह के आगे हार नहीं मानी। 

 

महाराणा प्रताप का जन्‍म, आज ही के दिन यानी की, 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ राजस्‍थान में हुआ था। प्रताप उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे। महाराणा प्रताप ने जब सिसोदिया राजवंश की गद्दी संभाली, तब दिल्‍ली में मुगल बादशाह जलालुद्दीन मोहम्‍मद अकबर का शासन था। कई परिस्‍थितियों के बीच महाराणा प्रताप ने मेवाड़ की बागडोर अपने हाथ में ली। महाराणा प्रताप ने अपने अद्दभुत शौर्य, कुशल रणनीति, हिम्‍मत, व युद्ध कौशल के जरिये मुगल सेनाओं को कई बार हराया। भारत के इतिहास में महाराणा प्रताप हल्‍दी घाटी के युद्ध के लिए भी प्रसिद्ध है, जब 1576 के हल्दीघाटी युद्ध में 20000 राजपूतों को साथ लेकर प्रताप ने अकबर की विशाल सेना का सामना किया और महज चंद मुट्ठीभर राजपूतों ने मुगलों के छक्‍के छुड़ा दिए।

 


इतिहासकार मानते हैं कि इस सेना में कोई विजय नहीं हुआ, लेकिन महाराणा प्रताप और राजपूतों का युद्ध कौशल देखकर मुगल हतप्रभ थे। इसके बाद भी महाराणा प्रताप और मुगलों के बीच लंबे समय तक युद्ध चलते रहे और प्रताप लगातार कई गढ़ जीतते रहे। बाद में महाराणा की सेना ने मुगल चौकियों पर आक्रमण शुरू कर उदयपुर समेत 36 बेहद अहम ठिकानों को अपने अधिकार में ले लिया। इतिहासकारों की मानें, तो 12 सालों के लंबे संघर्ष के बाद भी महाराणा प्रताप अकबर के अधीन नहीं आए। बताया जाता है कि राणा से अकबर इतना डर गया था, खासकर उसका युद्ध कौशल देखकर कि वह सपने में भी राणा के नाम से चौंक जाता था और पसीना-पसीना हो जाता था। 

 

यही नहीं लंबे समय तक राणा की तलवार अकबर के मन में डर के रूप में बैठ गई थी। कहा जाता है कि अकबर इतना सहमा हुआ था कि उसने अपनी राजधानी पहले लाहौर और बाद में राणा की मृत्‍यु के बाद आगरा ले जाने का फैसला किया। बहरहाल, राणा प्रताप की विजय और उनके वीरता के किस्‍से न केवल राजस्‍थान में बल्‍कि भारत सहित पूरे एशिया में आज भी गूंजते हैं। यकीनन ये अकबर की भी महानता ही थी कि जब उसे महाराणा की मृत्‍यु की खबर मिली, तो उसे बहुत दुःख हुआ और चूंकि वह महाराणा प्रताप के गुणों का प्रशंसक था और वह खुद भी जानता था कि महाराणा जैसा योद्धा और साहसी वीर पृथ्‍वी पर मुश्‍किल है, लिहाजा राणा की मौत की खबर सुनकर उसकी आंख में आंसू आ गए थे।

यह भी पढ़े: रातों रात करोड़पति बना यह गांव... जानिए इसकी वजह!

यह भी पढ़े: ये है दुनिया के सबसे पेचीदा 21 तथ्य जिनका जानना बेहद जरुरी... पढ़े एक बार

यह भी पढ़े: जिंदगी भर के लिए छिन गयी इस लड़की की हंसी... पढ़ना ना भूले

यह भी पढ़े : ताज़ा और रोचक ख़बरों से जुड़े रहने के लिए डाउनलोड करें हमारा एंड्राइड न्यूज़ ऍप

यह भी पढ़े: दुनिया के सबसे ठंडे महाद्वीप में पानी नहीं बल्कि बहता है खून, छिपे हैं कई राज

More From useful-tips

loading...
Trending Now
Recommended