संजीवनी टुडे

हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार को इस विधि विधान से करें पूजा

संजीवनी टुडे 13-08-2019 07:34:20

जब कोई भक्त हनुमानजी को सच्चे मन से समर्प्रित होकर याद करता है तब आसानी से हनुमानजी उस पर प्रसन्न हो जाते है | भगवान शिव के एकादश रुद्रावतारों में से एक हैं हनुमानजी। आपका जन्म वैशाख पूर्णिमा को हुआ माना जाता है।


डेस्क। मंगलवार हनुमान जी का वार हैं। जब कोई भक्त हनुमानजी को सच्चे मन से समर्प्रित होकर याद करता है तब आसानी से हनुमानजी उस पर प्रसन्न हो जाते है | भगवान शिव के एकादश रुद्रावतारों में से एक हैं हनुमानजी। आपका जन्म वैशाख पूर्णिमा को हुआ माना जाता है। इसी दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। हनुमान जी यानि बल-बुद्धि और कौशल के दाता, श्री राम जी के परम भक्त और भगवान शिव के रुद्रावतार। हनुमान जी को सदा से साहस और वीरता से जोड़कर देखा जाता है। आइये जानते हैं पूजन विधि 
 
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पूजन विधि

 मंगलवार को हनुमान जी को प्रसन्‍न करने के लिए हनुमान जी का पूजन करते समय सबसे पहले कंबल या ऊन के आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। इसके पश्चात हाथ में चावल व फूल लें व इस मंत्र से हनुमानजी का ध्यान करें-

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अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं

 
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यं।

 
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
 
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
 
ऊँ हनुमते नम: ध्यानार्थे पुष्पाणि सर्मपयामि।।

 
 
इसके बाद हाथ में लिया हुआ चावल व फूल हनुमानजी को अर्पित कर दें।
 
आवाह्न-
 
 हाथ में फूल लेकर इस मंत्र का उच्चारण करते हुए श्री हनुमानजी का आवाह्न करें एवं उन फूलों को हनुमानजी को अर्पित कर दें।
 
उद्यत्कोट्यर्कसंकाशं जगत्प्रक्षोभकारकम्।

श्रीरामड्घ्रिध्याननिष्ठं सुग्रीवप्रमुखार्चितम्।।

विन्नासयन्तं नादेन राक्षसान् मारुतिं भजेत्।।

ऊँ हनुमते नम: आवाहनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।।

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आसन-
 
नीचे लिखे मंत्र से हनुमानजी को आसन अर्पित करें (आसन के लिए कमल अथवा गुलाब का फूल अर्पित करें।) अथवा चावल या पत्ते आदि का भी उपयोग हो सकता है |
तप्तकांचनवर्णाभं मुक्तामणिविराजितम्।

अमलं कमलं दिव्यमासनं प्रतिगृह्यताम्।।

इसके बाद इन मंत्रों का उच्चारण करते हुए हनुमानजी के सामने किसी बर्तन अथवा भूमि पर तीन बार जल छोड़ें।

ऊँ हनुमते नम:, पाद्यं समर्पयामि।।

अध्र्यं समर्पयामि। आचमनीयं समर्पयामि।।

इसके बाद हनुमानजी को गंध, सिंदूर, कुंकुम, चावल, फूल व हार अर्पित करें।
अब इस मंत्र के साथ हनुमानजी को धूप-दीप दिखाएं-
 
 साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया।

दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्।।

भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने।।

त्राहि मां निरयाद् घोराद् दीपज्योतिर्नमोस्तु ते।।

ऊँ हनुमते नम:, दीपं दर्शयामि।।
 
 
इसके बाद केले के पत्ते पर या किसी कटोरी में पान के पत्ते के ऊपर प्रसाद रखें और हनुमानजी को अर्पित कर दें तत्पश्चात ऋतुफल अर्पित करें। (प्रसाद में चूरमा, भीगे हुए चने या गुड़ चढ़ाना उत्तम रहता है।)

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इसके बाद एक थाली में कर्पूर एवं घी का दीपक जलाकर हनुमानजी की आरती करें। इस प्रकार पूजन करने से हनुमानजी अति प्रसन्न होते हैं तथा साधक की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
 
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