संजीवनी टुडे

क्यों मनाई जाती है दिवाली? जानिए इसके पीछे का इतिहास

संजीवनी टुडे 23-10-2019 09:14:39

ज्यादातर लोग यही जानते है कि भगवान श्रीराम जी के लंकापति रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराकर वनवास से लौटने की ख़ुशी में दिवाली का पर्व मनाया जाता है लेकिन दीपावली का पर्व मनाने का केवल यही एकमात्र कारण नहीं है।


डेस्क। दिवाली का पर्व पाँच दिन बड़े जोर शोर से देश में मनाया जाता हैं। दिवाली का त्योहार हमारे देश के लोगों के जीवन में काफी महत्व रखता है इस दिन लोग अपने घरों को रोशन करतें हैं और धन कि देवी माता लक्ष्मी और गौरी पुत्र भगवान गणेश की पूजा करते हैं। इस साल भी दिवाली 25 अक्टूबर से शुरू हो कर 29 अक्टूबर तक मनाई जाएगी। ये त्योहार हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या के दिन आने वाला हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों का त्योहार है और हर धर्म का इस दिन के साथ खास महत्व जुड़ा हुआ है। हम दिवाली का त्यौहार क्यूँ मनाते हैं ? ज्यादातर लोग यही जानते है कि 'भगवान श्रीराम जी के लंकापति रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराकर वनवास से लौटने की ख़ुशी में'दिवाली का पर्व मनाया जाता है, लेकिन दीपावली का पर्व मनाने का केवल यही एकमात्र कारण नहीं है। दीपावली को मनाने के पीछे कई सारी कथाएं भी हैं। 

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पांडवों का वनवास हुआ था पूरा: महाभारत के अनुसार कार्तिक अमावस्या को पांडव अपना 12 साल का वनवास काट कर वापिस आये थे और इनका बाराह साल का वनवास पूरा होने की खुशी में इनसे प्रेम करने वाले लोगों ने अपने घरों में दीये जलाए थे।

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विक्रमादित्य का राज तिलक हुआ था: दीपावली के दिन ही भारत के महान राजा विक्रमदित्य का राज्याभिषेक हुआ था। हमारे देश के महाराजा विक्रमादित्य जिन्होंने दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य पर राज किया था,दीपावली के दिन ही भारत के महान राजा विक्रमदित्य का राज्याभिषेक हुआ था। 

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कृष्ण जी ने नरकासुर को मारा था: दीपावली के एक दिन पहले को नरक चतुर्दशी कहते है। क्योंकि इस दिन भगवान देवकी नंदन श्री कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था। जिसके बाद इस त्योहार को धूमधाम से मनाया गया था।

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राम भगवान की घर वापसी की खुशी में: रामायण के अनुसार दशरथ पुत्र भगवान श्री राम ने अपने वनवास काल मे लंका पति राजा रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया था। और  इन दिन भगवान राम जी अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अपना 14 साल का वनवास सफलता पूर्वक करके, अपने जन्म स्थान अयोध्या में लौटे थे। और इनके आने की खुशी में अयोध्या के निवासियों ने दीपावली अपने राज्य में मनाई थी। वहीं जब से लेकर अब तक हमारे देश में इस त्योहार को हर वर्ष मनाया जाता है।

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लक्ष्मी मां का जन्मदिन:  इस दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था और उनका विवाह भी भगवान विष्णु से इसी दिन हुआ था। कहाँ जाता है कि हर साल इन दोनों की शादी का जश्न हर कोई अपने घरों को रोशन करके मनाता है। 

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जैन धर्म के लोगों के लिए विशेष दिन: दीपावली का जैन धर्म में भी बहुत महत्त्व है।शास्त्रों के अनुसार जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर ने भी दीपावली के दिन ही बिहार के पावापुरी में अपना शरीर त्याग दिया। अपने धर्म के लिए इस दिन को महत्वपूर्ण बनाया।

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सिक्खों के लिए विशेष दिन: तीसरे सिक्ख गुरु अमरदास जी ने दीपावली के दिन को लाल पत्र दिवस के रूप में मनाया था, जिसके बाद से सभी सिख्क, अपने गुरु का आशीर्वाद इस दिन प्राप्त करते हैं. सन् 1577 में दीपावली के दिन ही अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की आधारशिला भी रखी गई थी।

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