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नवरात्रि का छठा दिन आज, अखिल ब्रह्मांड को उत्पन्न करती हैं मां कात्यायनी, जानें पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त एवं महत्व

संजीवनी टुडे 30-03-2020 08:50:37

नवरात्र के षष्ठी तिथि को भगवती दुर्गा के स्वरूप कात्यायनी देवी का पूजा की जाती है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को नवरात्रि का छठा दिन माना जाता है। आज के दिन मां कात्यायनी की पूजा करने से व्यक्ति प्रसिद्धि और सफलता प्राप्त करता है।


डेस्क। नवरात्र के षष्ठी तिथि को भगवती दुर्गा के स्वरूप कात्यायनी देवी का पूजा की जाती है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को नवरात्रि का छठा दिन माना जाता है। आज के दिन मां कात्यायनी की पूजा करने से व्यक्ति प्रसिद्धि और सफलता प्राप्त करता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां दुर्गा कात्यायन ऋषि के घर पुत्री के रूप में जन्म ली थीं, इसलिए उनका कात्यायनी पड़ा। उन्होंने महिषासुर का वध कर संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। आइए जानते हैं नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा विधि, मंत्र, पूजा मुहूर्त और महत्व के बारे में।

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मां कात्यायनी पूजा मुहूर्त

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि यानी चैत्र नवरात्रि का छठा दिन 30 मार्च दिन सोमवार को तड़के 02 बजकर 01 मिनट से प्रारंभ हुआ। षष्ठी तिथि का समापन 31 मार्च दिन मंगलवार को प्रात:काल 03 बजकर 14 मिनट पर होगा। ऐसे में आप मां कात्यायनी की पूजा सुबह से कर सकते हैं।


मां कात्यायनी की पूजा विधि

चैत्र नवरात्रि के छठे दिन आप सुबह स्नान आदि से निवृत्त हो जाए। उसके पश्चात मां कात्यायनी का स्मरण करें और उनकी विधिपूर्वक पूजा करें। माता कात्यायनी को शहद, धूप, गंध, अक्षत्, सिंदूर आदि अर्पित करें। संभव हो तो मां कात्यायनी को लाल गुलाब अर्पित करें, नहीं तो लाल पुष्प चढ़ा दें। माता को शहद का भोग प्रिय है। फिर उनके मंत्रों का उच्चारण करें और मां कात्यायनी की आरती करें।

प्रार्थना
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां कात्यायनी बीज मंत्र
क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम

मंत्र

1. एत्तते वदनम साओमयम् लोचन त्रय भूषितम।
2. ओम देवी कात्यायन्यै नमः॥

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शीघ्र विवाह के लिए कैसे करें मां कात्यायनी की पूजा?
 
- गोधूलि वेला में पीले वस्त्र धारण करें।
 -  मां के समक्ष दीपक जलाएं और उन्हें पीले फूल अर्पित करें। 
- इसके बाद 3 गांठ हल्दी की भी चढ़ाएं। 
 
-  मां कात्यायनी के मंत्रों का जाप करें। 
 "कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।"
 
- हल्दी की गांठों को अपने पास सुरक्षित रख लें। 
-  मां कात्यायनी को शहद अर्पित करें।
- अगर ये शहद चांदी के या मिटटी के पात्र में अर्पित किया जाए तो ज्यादा उत्तम होगा।  
- इससे आपका प्रभाव बढ़ेगा और आकर्षण क्षमता में वृद्धि होगी। 

कौन हैं मां कात्यायनी

मां कात्यायनी देवी दुर्गा का रौद्र रूप हैं। शेर पर सवार रहने वाली मां कात्यायनी अपनी दो भुजाओं में पुष्प और तलवार धारण करती हैं, जबकि अन्य दो भुजाएं अभय मुद्रा और वरद मुद्रा में रहती हैं। मां कात्यायनी योद्धाओं की परम प्रिय देवी हैं। जब संसार में असुरों का अत्याचार बढ़ गया था तब मां पार्वती अपने ज्वलंत स्वरूप में कात्यायन ऋषि के घर कन्या स्वरूप में प्रकट हुईं। कात्यायन ऋषि ने उनको अपनी पुत्री माना, इसलिए वे कात्यायनी हुईं।

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