संजीवनी टुडे

आज है श्रावण मास की चतुर्थी, ऐसे करें गणेश जी को प्रसन्न

संजीवनी टुडे 20-07-2019 07:53:01

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायकी तथा कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी कहलाती है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत सूर्योदय से सूर्यास्त तक होता है। चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही इस व्रत का पारण होता है।

डेस्क। सावन का महीना चल रहा है। आज (20 July 2019) श्रावण मास की बड़ी चतुर्थी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायकी तथा कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी कहलाती है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत सूर्योदय से सूर्यास्त तक होता है। चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही इस व्रत का पारण होता है। आज चंद्रोदय 9 बजकर 18 मिनट पर होगा। जीवन से सभी कष्टों को दूर करने वाले इस व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान श्री गणेश के निमित्त व्रत किया जाता है। इसे सकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानें व्रत करने वाले क्या करें इस दिन...
 
पूजन में दूब घास रखें और पीले रंग का मिष्ठान गणेश जी को जरूर भोग लगाएं।
 
पूजन के बाद व्रती को फल का आहार करना चाहिए।
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संध्या समय में भी भगवान गणेश और मां गौरी का पूजन करना चाहिए।
 
जब व्रत रखें तो सूर्य अस्त से पहले मीठा खाकर उपवास तोड़ें।
 
इस व्रत में अन्न ग्रहण करना निषेध माना जाता है, इसलिए अन्न की जगह फलाहार करना उचित रहता है।
 
अगर आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा का भंडार है और कोई उपाए काम नहीं कर रहे हैं, तो इस दिन व्रत रखें।
 
अपने घर में श्रीगणेश जी की सफेद रंग की मूर्ति स्थापित करें। ऐसा करने से आपके घर की सभी नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाएगी। श्रीगणेश की पूजा करते समय अपना मुंह पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर रखें। बाद में आसन पर बैठकर भगवान गणेश का पूजन करें।
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श्री गणेश को तिल से बनी वस्तुओं, तिल-गुड़ के लड्‍डू तथा मोदक का भोग लगाएं।
 
'ॐ सिद्धि बुद्धि सहित महागणपति आपको नमस्कार है। नैवेद्य के रूप में मोदक व ऋतु फल आदि अर्पित है। गणेश पूजन के दौरान धूप-दीप आदि से श्रीगणेश की आराधना करें। फल, फूल, रौली, मौली, अक्षत, पंचामृत आदि से श्रीगणेश को स्नान कराके विधिवत तरीके से पूजा करें।
 
गणेश जी को सिंदूर चढ़ाएं। सिंदूर चढ़ाते समय विशेष मंत्र को भी पढ़ें।
 
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ॐ सिंदूरारूण देहाय, ज्येष्ठ राजाय मंगलम, विघ्नराति भयघ्नाय विश्वनाथाय मंगलम
सप्तकोटि महामंत्र विघ्नायास्तु मंगलम, विघ्नेशस्य पठेनित्यं मंगलाष्टक मुत्तमम्।।
विघ्न सिद्धि धनं धान्यं श्रेय श्रियं वाप्नुयात्।।
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