संजीवनी टुडे

आज हैं गौरी तृतीया: गणगौर पूजा में अवश्य पढ़े ये पौराणिक कथा

संजीवनी टुडे 27-03-2020 08:30:53

हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाते हैं। यह पर्व विशेष रूप से महिलाएं मनाती हैं। गणगौर व्रत माता पार्वती और भगवान शिव की उपासना के लिए रखा जाता है। विवाहित महिलाएं सौभाग्य प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती हैं।


डेस्क। राजस्थान में मनाया जाने वाला पर्व है। जिसे हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाते हैं। यह पर्व विशेष रूप से महिलाएं मनाती हैं। गणगौर व्रत माता पार्वती और भगवान शिव की उपासना के लिए रखा जाता है। विवाहित महिलाएं सौभाग्य प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती हैं। हालांकि अविवाहित महिलाएं भी अच्छे जीवनसाथी के लिए यह व्रत रखती हैं। गणगौर पर्व भगवान शिव और पार्वती के आपसी रिश्तों व भगवान गणेश के जन्म से जु़ड़ी हुई पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। आइये जानते हैं 

Gangaur

 गणगौर पूजा, शुभ मुहूर्त

तृतीया तिथि प्रारम्भ - मार्च 26, 2020 को शाम 07:53 से 
तृतीया तिथि समाप्त - मार्च 27, 2020 को रात 10:12 तक 

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गणगौर की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, कहा जाता है कि एकबार चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि के दिन मां पार्वती और शिवजी नारदमुनि के साथ भ्रमण पर निकले थे। इस दौरान वे एक गांव में पहुंचें।  जब गांव की महिलाओं को उनके आगमन की खबर लगी तो वे उनकी स्वागत की तैयारी में जुट गईं। 

भगवान शिव शंकर और माता पार्वती भ्रमण के लिये निकल पड़े, उनके साथ में नारद मुनि भी थे। चलते-चलते एक गांव में पंहुच गये उनके आने की खबर पाकर सभी उनकी आवभगत की तैयारियों में जुट गये। कुलीन घरों से स्वादिष्ट भोजन पकने की खुशबू गांव से आने लगी। लेकिन कुलीन स्त्रियां स्वादिष्ट भोजन लेकर पंहुचती उससे पहले ही गरीब परिवारों की महिलाएं अपने श्रद्धा सुमन लेकर अर्पित करने पंहुच गयी। 

माता पार्वती ने उनकी श्रद्धा व भक्ति को देखते हुए सुहाग रस उन पर छिड़क दिया। जब उच्च घरों स्त्रियां तरह-तरह के मिष्ठान, पकवान लेकर हाज़िर हुई तो माता के पास उन्हें देने के लिये कुछ नहीं बचा तब भगवान शंकर ने पार्वती जी कहा, अपना सारा आशीर्वाद तो उन गरीब स्त्रियों को दे दिया अब इन्हें आप क्या देंगी? माता ने कहा इनमें से जो भी सच्ची श्रद्धा लेकर यहां आयी है उस पर ही इस विशेष सुहागरस के छींटे पड़ेंगे और वह सौभाग्यशालिनी होगी।

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तब माता पार्वती ने अपने रक्त के छींटे बिखेरे जो उचित पात्रों पर पड़े और वे धन्य हो गई। लोभ-लालच और अपने ऐश्वर्य का प्रदर्शन करने पंहुची महिलाओं को निराश लौटना पड़ा। मान्यता है कि यह दिन चैत्र मास की शुक्ल तृतीया का दिन था तब से लेकर आज तक स्त्रियां इस दिन गण यानि की भगवान शिव और गौर यानि की माता पार्वती की पूजा करती हैं।

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