संजीवनी टुडे

बहाई धर्म का सबसे बड़ा पर्व : रिजवान

संजीवनी टुडे 21-04-2018 09:57:46


जयपुर। स्थानीय आध्यात्मिक सभा जयपुर की ओर से शुक्रवार की शाम बापू नगर स्थित बहाई हाउस मे पर्वराज 'रिज़वान' का पर्व मनाया गया। कार्यक्रम की शुरूआत विभिन्न भाषा मे की गई प्रार्थनाओं से हुई और राजेश मीना द्वारा विशेष प्रार्थना की गई। इस अवसर पर स्थानीय आध्यात्मिक सभा  कोषा अध्यक्ष बनवारी चंदवाडा ने गत वर्ष की अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, और इसी के साथ वर्ष 2018-19 के लिए नई आध्यात्मिक सभा का चुनाव किया गया। गौरतलब है कि रिज़वान के पहले दिन यानी 21 अप्रैल को पूरा विश्व में सभाओं का चुनाव किया जाता है जहां किसी प्रकार का चुनाव प्रचार और उम्मीदवार नहीं होता है स्थानीय बहाई स्वविवेक से 9 व्यक्तियों का चुनाव करता है जो अगले एक साल के लिए प्रभावी होता है। यह चुनाव एकदम आध्यात्मिक माहौल मे संपन्न हो रहे हैं कार्यक्रम का समापन रात्रिभोज के साथ सम्पन्न हुआ। 

bahai dharm

क्या है रिज़वान पर्वत ...
बहाई धर्म के संस्थापक बहाउल्लाह ने रिजवान पर्व को त्यौहारों का सरताज संग्रह है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष 21 अप्रैल से प्रारंभ होकर 2 मई तक मनाया जाता है। 12 दिन की अवधि का यह एक आध्यात्मिक उत्सव है। पर्व का प्रत्येक दिन बहाउल्लाह की 12 उद्घोषणाओं का प्रतीक है। ये वे ही 12 दिन है, जब बहाउल्लाह ने कांसटेंटिनोपल में निर्वासन से पहले बगदाद के बाहर रिजवान नामक उद्यान में वर्ष 1863 में किया गया था। इस अवधि को व्यवस्थित करें चिंतन- मनन में व्यतीत कर जो आध्यात्मिक निष्कर्ष निकाला, उसे स्वयं धर्मातियों और समस्त संसार के लिए खुलेआम घोषित किया। इन 12 दिनों में से तीन दिनों का विशेष महत्व है, जो इस प्रकार है-

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21 अप्रैल यानी के पहले दिन को उन्होंने स्वयं को ईश्वरीय अवतार के रूप में घोषित किया। यह दिन बहाई समुदाय का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है और भी दिन प्रतिवर्ष स्थानीय बहाई धर्म सभाओं के चुनाव संपन्न है।

 2 9 अप्रैल यानी नवे दिन का महत्व इसलिए है, क्योंकि उसी दिन धर्म के संस्थापक बहाउल्लाह का परिवार उनसे आकर मिला था।

 रिजवान का अंतिम दिन अर्थात् बाहरवा दिन 2 मई का भी अपना विशेष महत्व है, क्योंकि वे दिन दिन रिजवान नामक उद्यान, जहां वे यात्रा में थे, को छोड़ दिया गया था।

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बहाउल्लाह ने रिजवान पर्व की अवधि में अपना पालन करने के लिए अपने अनुयायियों को त्रिसुत्री संदेश दिया है। ये तीनों संदेश पूजा और सद्भाव के पर्यावरण में जीवन-यापन करने के लिए शाश्वत महत्व के हैं। ये तीनों संदेश इस प्रकार है-

आज से धर्म के लिए कभी युद्ध नहीं होगा। 

 भगवान का संदेश स्वयं अनुयायियों या अन्य धर्मप्रिय जनता में हे-जबरदस्ती या दबाव देकर न प्रचारित किया गया, क्योंकि वाणी की शक्ति और परिवर्तन के प्रभाव से किया गया कार्य स्थायी रूप से होता है।

प्रभु के शब्दों में असीम शक्ति और प्रभाव है कि मनुष्य के ह्रदय का अंधकार उनको आत्मसाष्ट करने के पश्चात: दूर होने के कारण है। हिंदू दर्शन में शब्द को ब्रह्म कहा गया है। बहाई धर्मगुरु ने कहा कि अवतार अवधारणा प्रस्तुत किया गया है।

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इस धर्म के सभी सिद्धांतों को स्वयं बहाउल्लाह ने स्थापित किया है। बहाईयों का विश्वास है कि जैसे-जैसे इस धर्म और उसकी व्यवस्थाओं का प्रचार होगा, वैसे-वैसे यह धर्म शक्तिशाली बनकर विश्व की ओर अधिकाधिक प्रवृत्त होता रहेगा। इस धर्म की एक और विशेषता है, कि इसके धर्मावलम्बी जाति-पाति, धर्म-संप्रदाय आदि को भुलाकर मानवमात्र की सेवा के लिए उद्यत रहते है। रिजवान पर्व को  इस समुदाय के लोग सामूहिक रूप से हश्रोल्लास से मनाते हैं। यह धर्म मानव सेवा की वजह से अन्य धर्मों की अपेक्षा इस अर्थ में विलक्षण है, क्योंकि यह मानवमात्र में प्रेम, एकता और अध्यात्म का संदेश देकर मनय एकता को सुदृढ़ करने में लगा हुआ है। रिजवान पर्व के अवसर पर पारिवारिक मेल-मिलाप के अतिरिक्त धर्म सभाओं के भी आयोजन किया जाता है, जहां इस धर्म के संस्थापक और उनके सिद्धांतों पर प्रकाश डाला जाता है।

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