संजीवनी टुडे

रक्षा बंधन का त्यौहार मुंहबोली बहिनों ने किया शुरू

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 14-08-2019 14:13:21

बहना ने भाई की कलाई से प्यार बाँधा है,प्यार के दो तार से संसार बाँधा है भले ही ये गाना बहुत पुराना न हो पर भाई की कलाई पर राखी बाँधने का सिलसिला प्राचीन है जिसे मुंह बोली बहिनों ने शुरू किया।


प्रयागराज। “बहना ने भाई की कलाई से प्यार बाँधा है,प्यार के दो तार से संसार बाँधा है” भले ही ये गाना बहुत पुराना न हो पर भाई की कलाई पर राखी बाँधने का सिलसिला प्राचीन है जिसे मुंह बोली बहिनों ने शुरू किया।

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रक्षाबंधन की परंपरा ही उन बहिनों ने डाली थी जो मुंह बोली थीं। भले ही उन बहिनों ने अपने सुरक्षा के लिए ही इस पर्व की शुरुआत क्यों न की हो लेकिन उसी बदौलत आज भी इस त्योहार की मान्यता बरकरार है। इतिहास इसका गवाह है कि मुंह बोली बहिनों ने रक्षा बंधन की शुरूआत की।

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जीवन की रक्षा का प्रतिबद्धता, आत्मीयता और स्नेह से रिश्तों को मजबूती प्रदान करने वाला रक्षाबंधन पर्व भारतीय समाज में इतनी व्यापकता और गहराई से समाया हुआ है कि इससे सामाजिक महत्त्व, धर्म, पुराण, इतिहास, साहित्य और फिल्में भी इससे अछूते नहीं हैं। यह आत्मीयता और स्नेह के बन्धन से रिश्तों को मज़बूती प्रदान करने का पर्व है।

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वैदिक शोध संस्थान एवं कर्मकाण्ड प्रशिक्षण केन्द्र के पूर्व आचार्य डा आत्माराम गौतम ने बताया कि श्रावण मास के पूर्णिमा दिवस पर मनाया जाने वाला यह पर्व रक्षा की प्रतिबद्धता, आत्मीयता और प्रेम का प्रतीक है। रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है। रक्षा के लिए बांधा गया सूत्र ही रक्षासूत्र या रक्षा बंधन है। इसकी सार्थकता एक कच्चे धागे की होती है जबकि आज रेशम और अनेक मंहगे रक्षा बंधन प्रचलन में हैं।

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यह रक्षा सूत्र कोई भी किसी को बांध सकता है। पुरोहित औने यजमान को, पत्नी-पती को, माता-पिता बेेटे और बेटी को, बहिन भाई को, गुरू-शिष्य को और बहिन-बहिन को। यह बंधन रक्षा बांधने वाले और बंधवाने वाले दोनों को एक दूसरे की रक्षा के लिए प्रेरित करता है।

गोवर्मेन्ट एप्रूव्ड प्लाट व फार्महाउस मात्र रु. 2600/- वर्गगज, टोंक रोड (NH-12) जयपुर में 9314166166

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