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Sawan Shivaratri 2020: इस दिन हैं सावन की शिवरात्रि, विशेष फलदायी है यह दिन, हर मुराद हो जाती है पूरी

संजीवनी टुडे 12-07-2020 08:48:52

सावन मास में शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शिवरात्रि मनाई जाती है। शिवरात्रियों में से दो सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं फाल्गुन त्रियोदशी महा शिवरात्रि के नाम से प्रसिद्ध है और दूसरी सावन शिवरात्रि के नाम से जानी जाती है।


डेस्क। सावन मास में शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शिवरात्रि मनाई जाती है। शिवरात्रियों में से दो सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं, फाल्गुन त्रियोदशी महा शिवरात्रि के नाम से प्रसिद्ध है और दूसरी सावन शिवरात्रि के नाम से जानी जाती है। यह त्यौहार भगवान शिव-पार्वती को समर्पित है इस बार श्रावण मास की शिवरात्रि 19  जुलाई 2020, रविवार को मनाई जाएगी।

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मान्यता है जो भी भक्त पूरी श्रद्धा भाव से सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की आराधना करता है उसकी सभी तरह की मनोकामना सावन के महीने में भोले शंकर जरूर पूरी करते हैं। जब मनुष्य पर हर ओर से संकट आ जाता है और जीवन में अधंकार छा जाता है तो शिवभक्ति रूपी नैया से सभी बाधाएं और कष्ट मिटते हैं। सुखद जीवन के लिए आप भी भोलेभंडारी की शरण में जाएं, श्रावण मास की शिवरात्रि पर अपनाएं यह आसान उपाय, क्योंकि इस दिन यह उपाय करने से जीवन के सब संकट कट जाते हैं। आइए जानें...

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सावन शिवरात्रि पूजा समय :

चतुर्दशी तिथि शुरू : 00:45 - 19 जुलाई 2020
चतुर्दशी तिथि ख़त्म : 00:10 - 20 जुलाई 2020

इस शिवरात्रि का महत्व इसलिये भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें भगवान शिव का जलाभिषेक करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है। सावन के पूरे महीने शिवभक्त बम भोले, हर-हर महादेव के नारे लगाते हुए नजर आते हैं। शिवरात्रि के दिन जलाभिषेक के लिये हरिद्वार, गौमुख से कांवड़ भी लेकर आते हैं। मान्यता है कि श्रावण महीने की शिवरात्रि के दिन जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करते हैं उनके कष्टों का निवारण होता है और मुरादें पूरी हो जाती हैं।

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अचूक उपाय :-

-सावन शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान कर यथासंभव सफेद वस्त्र पहन घर या शिवालय में शिवलिंग को पवित्र जल से स्नान कराएं।

-स्नान के बाद यथाशक्ति गन्ने के रस की धारा शिवलिंग पर नीचे लिखें मंत्र या पंचाक्षरी मंत्र नम: शिवाय बोलकर अर्पित करें -

रूपं देहि जयं देहि भाग्यं देहि महेश्वर:।
पुत्रान् देहि धनं देहि सर्वान्कामांश्च देहि मे।।

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-इसके बाद गन्ने के रस से अभिषेक के बाद पवित्र जल से स्नान कराकर गंध, अक्षत, आंकड़े के फूल, बिल्वपत्र शिव को अर्पित करें। सफेद व्यंजनों का भोग लगाएं। किसी शिव मंत्र का जप करें।

-धूप, दीप व कर्पूर आरती करें।

- अंत में क्षमा मांगकर दुखों से मुक्ति व रक्षा की कामना करें।

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