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Rakshabandhan2020: रक्षाबन्धन के दिन ही श्रीकृष्ण ने रखी थी द्रौपदी के बंधन की लाज, जानें कैसे ?

संजीवनी टुडे 31-07-2020 14:18:27

रक्षाबंधन का त्योहार सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है।


डेस्क। रक्षाबन्धन एक हिन्दू व जैन त्योहार है जो प्रतिवर्ष सावन मास की पूर्णिमा के दिन बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का बहुत अधिक महत्त्व होता है। भाई की कलाई में राखी बांधने के लिए बहनें रक्षाबंधन का बहुत बेसब्री से इंतजार करती है। वहीं भाई को भी इस दिन का बहुत इंतजार रहता है। वो भी बहनों से राखी बंधवाने को बेताब रहते हैं। रक्षाबंधन का त्योहार सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार सावन के आखिरी सोमवार यानि 3 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार पड़ रहा है। इस दिन भाइयों की कलाई पर खूबसूरत राखियां सजेंगी।  

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 इस त्योहार को द्रौपदी और श्रीकृष्ण के संबंध को लेकर भी याद किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी के स्वयंवर में शिशुपाल, जरासंध और अन्य राजाओं से द्रौपदी की रक्षा की थी। वह अपना सुदर्शन चक्र निकालकर सभी को भयभित कर देते हैं। सुदर्शन चक्र को देखकर शिशुपाल और दुर्योधन सहित सभी भयभित होकर वहां से चले जाते हैं। इस पर श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र और बलराम का हल गायब हो जाता है और तब श्रीकृष्ण अर्जुन की ओर देखकर मुस्कुराते हैं और उसके पास आकर कहते हैं वीर धनुर्धर तुम निर्भय होकर द्रौपदी को लेकर यहां से जाओ। ये आज से तुम्हारी हुई। हम देखते हैं कौन तुम्हारा पीछा करता है। यह सुनकर द्रौपदी हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण से कहती हैं- आज आपने हमारे प्राणों की रक्षा की है इसके लिए मैं आपको प्रणाम करती हूं और जीवनभर आपकी आभारी रहूंगी केशव। यह कहकर द्रौपदी श्रीकृष्ण के चरण छू लेती हैं। तब श्रीकृष्ण उसे उठाकर कहते हैं- और हम जीवनभर तुम्हारी रक्षा करते रहेंगे देवी द्रौपदी। यह सुनकर द्रौपदी कहती हैं- वचन दे रहे हो द्वारिकापति इसे निभाओगे भी? तब श्रीकृष्ण कहते हैं- अवश्य निभाऊंगा पांचाली। आज से मैं तुम्हें अपनी छोटी बहन मानता हूं और वचन देता हूं कि किसी भी सहायता के लिए जब भी मुझे याद करोगी तो हमें उसी क्षण अपने पास पाओगी। 

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इस प्रकार श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को बहन बनाकर उसकी हर समय रक्षा की है माना जाता है कि युधिष्ठर के राजसूय यज्ञ के दौरान जब शिशुपाल ने श्रीकृष्ण का अपमान किया तो उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काटकर उसका वध कर दिया था। इस कार्य के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की अंगुली में चोट चोट लग गई तथा खून की धार बह निकली। यह सब द्रौपदी से नहीं देखा गया और उसने तत्काल अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर श्रीकृष्ण के हाथ में बांध दिया फलस्वरूप खून बहना बंद हो गया। तब श्रीकृष्ण ने कहा था यह पल्लू का टुकड़ा तुम्हारे बहुत काम आएगा द्रौपदी। ब्याज सहित लौटाऊंगा। तब द्रौपदी यह समझ नहीं पाई थी कुछ समय बाद जब पांडव जुए में इंद्रप्रस्थ हार गए तो उन्होंने दौपदी को भी दांव पर लगा दिया। इस कारण दुःशासन ने द्रौपदी को उसके बाल सहित पकड़ा और भरी सभा में चीरहरण के लिए ले आया। उस समय द्रौपदी ने श्रीकृष्ण को पुकारा तब श्रीकृष्ण ने चीर बढ़ाकर इस बंधन का उपकार चुकाया और द्रौपदी की साड़ी को इतना लंबा कर दिया की दुषशासन खींचते खींचे थक हारकर गिर पड़ा। यह प्रसंग भी रक्षा बंधन के महत्व को प्रतिपादित करता है।

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