संजीवनी टुडे

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर तैयारियां जोरों पर, तो इस लिए मनाया जाता है ये पर्व

संजीवनी टुडे 15-07-2019 04:51:00

इस साल में गुरु पूर्णिमा 16 जुलाई को मनाया जाएगा। इस दिन गुरु पूजा का विधान है।


धर्म डेस्क। इस साल में गुरु पूर्णिमा 16 जुलाई को मनाया जाएगा। इसको लेकर सभी रामद्वारों, मठों तथा गुरु स्थलों पर तैयारियां की जा रही हैं। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरंभ में आती है। इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक, साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी गुरु पूर्णिमा को है। वे संस्कृत के विद्वान थे और उन्होंने चारों वेदों की रचना की थी। इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। 

राधा रानी सेवा समिति द्वारा आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव प्रताप नगर स्थित हनुमान शनिधाम में मनाया जाएगा। पंडित दामोदर भारद्वाज महाराज के सानिघ्य सुबह नौ बजे गुरुपूजन तथा दोपहर एक बजे आशीर्वचन का कार्यक्रम होगा। शिक्षक नगर स्थित संत गुलाबदास आश्रम में संत रामप्रकाश के सानिध्य में गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया जाएगा। 

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गुरु पूर्णिमा पर 149 साल बाद इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण रहेगा। यह चंद्र ग्रहण भारत समेत यूरोप अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी एवं दक्षिण पूर्व अमेरिका प्रशांत एवं हिंद महासागर से नजर आएगा। इस साल का यह आखिरी चंद्र ग्रहण काफी अहम रहेगा, क्योंकि 149 साल बाद गुरु पूर्णिमा के दिन ग्रहण लग रहा है। पिछली बार 12 जुलाई 1870 को गुरु पूर्णिमा के ही दिन ऐसा चंद्र ग्रहण लगा था, जिसका राशियों पर गहरा प्रभाव पड़ा था। ज्योतिषों के अनुसार उस ग्रहण के दौरान चंद्रमा शनि, राहू एवं केतु के साथ धनु राशि में था। इस बार भी ऐसा ही कुछ होने जा रहा है। इस चंद्र ग्रहण का विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा।

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