संजीवनी टुडे

नवरात्रि 2018: माता कुष्मांडा की विधि-विधान से पूजा करने पर मिलेगी अपार सफलता

संजीवनी टुडे 14-10-2018 02:01:00


डेस्क। माता कुष्मांडा को नवरात्रि के चौथे दिन पूजा जाता है। चौथे दिन देवी माता कुष्मांडा की कृपा भक्तों पर बरसती है। मान्यता है कि माता कुष्मांडा ने ही संसार की रचना की थी। इसीलिए इन्हें आदिशक्ति के नाम से भी जाना जाता है। नौ दिन के नवरात्रि में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा के बाद कुष्मांडा को भक्ति-भाव से पूजा जाता है।

कौन हैं मां कुष्मांडा 
चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए माता कुष्मांडा को सभी दुखों को हरने वाली देवी माना गया है। मान्यता है कि मां कुष्मांडा ने ही इस सृष्टि की रचना की है। इनका निवास स्थान सूर्य है। इसीलिए माता कुष्मांडा के पीछे सूर्य का तेज दर्शाया जाता है। मां दुर्गा का यह एकलौता ऐसा रूप है जिन्हें सूर्यलोक में रहने की शक्ति प्राप्त है।इनके अलावा माता कोई भी रूप सूर्यलोक में नहीं रहता। 
 

पूजा विधि

कूष्माण्डा माता की पूजा संतरी रंग के कपड़े पहनकर करें, मान्यता है कि इस दिन प्रसाद में हलवा शुभ माना जाता है। घर में सौभाग्य लाने के लिए कुष्मांडा माता की पूजा के बाद मेवे या फल दान करें।

कुष्मांडा माता की आरती
कुष्मांडा जय जग सुखदानी
मुझ पर दया करो महारानी
पिंगला ज्वालामुखी निराली 
शाकम्बरी माँ भोली भाली 
लाखो नाम निराले तेरे 
भगत कई मतवाले तेरे 
भीमा पर्वत पर है डेरा 
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा 
संब की सुनती हो जगदम्बे 
सुख पौचाती हो माँ अम्बे 
तेरे दर्शन का मै प्यासा 
पूर्ण कर दो मेरी आशा 
माँ के मन मै ममता भारी 
क्यों ना सुनेगी अर्ज हमारी 
तेरे दर पर किया है डेरा 
दूर करो माँ संकट मेरा 
मेरे कारज पुरे कर दो 
मेरे तुम भंडारे भर दो 
तेरा दास तुझे ही ध्याये 
'भक्त' तेरे दर शीश झुकाए

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