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Makar Sankranti 2020: जानिए क्यों कहते हैं मकर संक्रांति और कहाँ - कहाँ और किस रूप में मनाया जाता हैं ये त्योहार

संजीवनी टुडे 14-01-2020 04:44:00

मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। हर बार की तरह इस बार भी मकर संक्रांति की सही तारीख को लेकर उलझन की स्थिति बनी हुई है कि मकर संक्रांति का त्योहार इस बार 14 जनवरी को मनाया जाएगा या 15 जनवरी को।


डेस्क। मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। हर बार की तरह इस बार भी मकर संक्रांति की सही तारीख को लेकर उलझन की स्थिति बनी हुई है कि मकर संक्रांति का त्योहार इस बार 14 जनवरी को मनाया जाएगा या 15 जनवरी को। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस वर्ष 15 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार मनाना चाहिए। दीर्घायु, आरोग्य, धन-धान्य, ऐश्वर्य समेत सर्व मंगल के कारक प्रत्यक्ष देव सूर्य धनु से मकर राशि में सुबह 8:24 बजे प्रवेश कर जाएंगे।  हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार यदि किसी वर्ष मकर संक्रांति का पर्व शाम को पड़ता है तो इसे अगले दिन मनाया जाता है। यह वजह है कि इस वर्ष मकर संक्रांति को 15 जनवरी को मनाया जायेगा। मकर संक्रांति के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान करने से व्यक्ति को उसका अभीष्ट लाभ मिलता है।

Makar Sankranti

क्यों कहते हैं मकर संक्रांति?

मकर संक्रांति में 'मकर' शब्द मकर राशि को इंगित करता है जबकि 'संक्रांति' का अर्थ संक्रमण अर्थात प्रवेश करना है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। एक राशि को छोड़कर दूसरे में प्रवेश करने की इस विस्थापन क्रिया को संक्रांति कहते हैं। चूंकि सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है इसलिए इस समय को 'मकर संक्रांति' कहा जाता है। हिन्दू महीने के अनुसार पौष शुक्ल पक्ष में मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है।

Makar Sankranti

मकर संक्रांति कहाँ - कहाँ और किस रूप में मनाई जाती है -

जैसी विविधता इस पर्व को मानाने में है वैसी किसी और पर्व में नहीं| त्यौहार के नाम, महत्त्व और मनाने के तरीके प्रदेश और भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदल जाते हैं| दक्षिण भारत में इस त्योहार को पोंगल, तो वहीं उत्तर भारत में इसे लोहड़ी, खिचड़ी, उत्तरायण, माघी, पतंगोत्सव आदि के नाम से जाना जाता है मध्यभारत में इसे संक्रांति कहा जाता है|

Makar Sankranti

मकर संक्रांति के विशेष पकवान -

शीत ऋतु में वातावरण का तापमान बहुत कम होने के कारण शरीर में रोग और बीमारियां जल्दी घात करती हैं| इसलिए इस दिन गुड़ और तिल से बने मिष्ठान्न या पकवान बनाये, खाये और बांटे जाते हैं|  इन पकवानों में गर्मी पैदा करने वाले तत्वों के साथ ही शरीर के लिए लाभदायक पोषक पदार्थ भी मौजूद होते हैं| इसलिए उत्तर भारत में इस दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाता है तथा गुड़-तिल, रेवड़ी, गजक आदि का प्रसाद बांटा जाता है|

Makar Sankranti

मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त

संक्रांति काल - 15 जनवरी 07:19 बजे
पुण्यकाल - 07:19 से 12:31 बजे तक
महापुण्य काल - 07:19 से 09:03 बजे तक
संक्रांति स्नान - 15 जनवरी 2020 प्रात:काल

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