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Lunar eclipse: आज लगने जा रहा हैं साल का तीसरा चंद्रग्रहण, जानें कितना प्रभावशाली होगा यह ग्रहण

संजीवनी टुडे 05-07-2020 08:11:48

आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण लग रहा है। यह उपच्छाया चंद्रग्रहण होगा जो भारत में नहीं दिखाई देगा।


डेस्क। आज रविवार यानि 5 जुलाई को साल का तीसरा चंद्रग्रहण लगेगा। इसी दिन गुरु पूर्णिमा भी है। दरअसल चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा के दिन ही लगता है और सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन। आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण लग रहा है। यह उपच्छाया चंद्रग्रहण होगा जो भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए यहां पर ग्रहण का सूतक भी मान्य नहीं होगा।

Lunar eclipse

चंद्रग्रहण का समय

यह ग्रहण 5 जुलाई को सुबह 8 बजकर 38 मिनट से आरंभ होगा। इस चंद्र ग्रहण की अवधि 2 घंटा 43 मिनट और 24 सेकेंड होगी। इस उपच्छाया चंद्रग्रहण को अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के हिस्सों में देखा जा सकेगा।

कैसे लगता है चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण?

असल में यह एक खगोलीय घटना होती है। चंद्र ग्रहण उस खगो‍लीय घटना को कहा जाता है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है। वहीं, सूर्य ग्रहण तब माना जाता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से होकर गुजरता है। 

Lunar eclipse

कितना प्रभावशाली होगा चंद्र ग्रहण

गुरु पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्रग्रहण भारत के संदर्भ में बहुत ज्यादा प्रभावशाली नहीं होगा। क्योंकि यह एक उपच्छाया चंद्रग्रहण है और यहां दिखाई भी नहीं देगा। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण धनु राशि में लगेगा। धनु राशि में गुरु बृहस्पति और राहु मौजूद हैं।

अतः ग्रहण के दौरान बृहस्पति पर राहु की दृष्टि धनु राशि को प्रभावित करेगी। धनु राशि के जातकों का मन अशांत रह सकता है। उनके मन में नकारात्मक विचार आ सकते हैं। माता जी की सेहत पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। मन को एकाग्र रखने के लिए ध्यान लगाएं और माता जी का ख्याल रखें।

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कैसे लगता है उपच्छाया चंद्रग्रहण

उपच्छाया चंद्रग्रहण में चांद के आकार में किसी भी प्रकार का कोई भी बदलाव देखने को नहीं मिलता है। इसमें सिर्फ चांद मटमैला जैसा हो जाता है। दरअसल उपच्छाया चंद्रग्रहण में पृथ्वी की छाया वाले क्षेत्र में चंद्रमा आ जाता है और चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी बहुत ही कम पड़ती प्रतीत होती है। इसे ही उपच्छाया चंद्रग्रहण कहते हैं। ठीक एक माह पहले 5 जून को भी उपच्छाया चंद्रग्रहण लगा था। चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष सावधानी की जरूरत नहीं होती है। चंद्र ग्रहण पूरी तरह से सुरक्षित होता है इसलिए आप इसे नंगी आंखों से देख सकते हैं। आप चाहें तो टेलिस्‍कोप की मदद से भी चंद्र ग्रहण देख सकते हैं। 

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