संजीवनी टुडे

अब एक माह तक कनखल में विराजेंगे भगवान शिव

संजीवनी टुडे 16-07-2019 17:04:37

गुरु पूर्णिमा पर्व के अगले दिन भगवान शिव का प्रिय मास श्रावण आरम्भ हो जाता है।


हरिद्वार। गुरु पूर्णिमा पर्व के अगले दिन भगवान शिव का प्रिय मास श्रावण आरम्भ हो जाता है। इस बार बुधवार से श्रावण मास आरम्भ हो रहा है। ऐसे में भोले के भक्त अपने ईष्ट को मनाने के लिए पूरे मास पूजा की तैयारियों में जुट गए हैं। 

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देवशयनी एकादशी के साथ सृष्टि की सत्ता का संचालन चार मास के लिए भगवान शिव के हाथों में आ जाता है और भगवान विष्णु राजा बलि को दिए अपने वरदान के कारण पाताल लोक की सत्ता को चार मास के लिए संभालते हैं। श्रावण मास और भगवान शिव से जुड़ी एक और मान्यता है। यूं तो कनखल भगवान शिव की ससुराल है। 

किन्तु मान्यता है कि सावन मास में भगवान अपने ससुर राजा दक्ष को दिए वरदान के मुताबिक श्रावण मास में कनखल में ही निवास करते हैं। पं. देवेन्द्र शुक्ल शास्त्री के मुताबिक श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना करने और गंगा जल से अभिषेक करने से भगवान शिव अपने भक्तों पर अपनी अपार कृपा की बरसात करते हैं। 

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पौराणिक मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव को गंगाजल से जलाभिषेक करना सबसे उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि सावन के एक माह तक भगवान शिव कैलाश से आकर अपनी ससुराल कनखल में निवास करते हैं। 

भगवान विष्णु के शयन में चले जाने के बाद सावन में भगवान शिव ही ब्रह्मांड की सत्ता का संचालन कनखल दक्ष मंदिर में रहकर ही करते हैं। इसलिए सावन में भगवान शिव की पूजा-अर्चना और गंगाजल से अभिषेक का महत्व है।

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