संजीवनी टुडे

पुरा महादेव में भगवान परशुराम ने किया था जलाभिषेक

संजीवनी टुडे 18-07-2019 08:30:52

प्रथम कांवड़िया भगवान परशुराम को माना जाता है, जिन्होंने हरिद्वार से गंगाजल लाकर बागपत के पुरा गांव महादेव मंदिर की स्थापना करके भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया था।


मेरठ। श्रावण मास की पवित्र कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है। समूचे उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा का ऐतिहासिक महत्व है। प्रथम कांवड़िया भगवान परशुराम को माना जाता है, जिन्होंने हरिद्वार से गंगाजल लाकर बागपत के पुरा गांव महादेव मंदिर की स्थापना करके भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया था।

भगवान शिव के अनन्य भक्त भगवान परशुराम के पिता महर्षि जमदग्नि का आश्रम बागपत के पुरा गांव में था। प्राचीन हरनंदी नदी (अब हिंडन) के पास स्थित आश्रम में बालक परशुराम रहते थे। अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए परशुराम हरिद्वार से गंगाजल लेकर आए और वहां महादेव मंदिर की स्थापना करके शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।

पुरा महादेव मंदि में श्रावण मास की शिवरात्रि और प्रत्येक महाशिवरात्रि पर मेले का आयोजन होता है। शिवरात्रि पर लाखों हरिद्वार से अनुशासन, सात्विकता और वैराग्य भाव से युक्त कांवड़ियां कठिन यात्रा करके यहां आकर शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। 

गाजियाबाद का दूधेश्वर नाथ मंदिर
बताया जाता है कि लंकापति रावण का जन्म नोएडा के बिसरख गांव में हुआ था। वह अपने पिता विश्रवा मुनि के साथ प्रतिदिन दूधेश्वर महादेव मंदिर में आकर पूजा-अर्चना करता था। इस कारण इस मंदिर का भी ऐतिहासिक महत्व है। मंदिर के महंत नारायण गिरि ने बताया कि शिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालु यहां गंगाजल चढ़ाते हैं। दशानन रावण भी यहां हरिद्वार से गंगाजल लेकर आए थे।

मेरठ का औघड़नाथ मंदिर
छावनी क्षेत्र में स्थित औघड़नाथ मंदिर को काली पलटन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। अंग्रेजों के समय में यहां पर भारतीय सेना रहती थी और पूजा करती थी। इसी कारण इसे काली पलटन मंदिर भी कहते हैं। यहां पर भी शिवरात्रि और महाशिवरात्रि को कांवड़िये जल चढ़ाते हैं।

मेरठ का बिल्वेश्वर महादेव मंदिर
मेरठ में सदर स्थित बिल्वेश्वर महादेव मंदिर की बहुत मान्यता है। बिल्व पत्रों की प्रचुरता होने के कारण इसे बिल्वेश्वर महादेव मंदिर कहा जाता है। बताया जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी यहां पर प्रतिदिन पूजा करने के लिए आती थी। 

गगोल का महादेव मंदिर
गगोल में बताया जाता है कि महर्षि विश्वामित्र का आश्रम था और यहां का प्राचीन महादेव मंदिर श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। पवित्र गगोल सरोवर में स्नान करके श्रद्धालु महादेव मंदिर में पूजा करते हैं। सरधना के पास स्थित महादेव गांव में मराठों द्वारा बनाया गया महादेव मंदिर मौजूद है। अन्य शिव मंदिर में दबथुवा गांव का महादेव मंदिर, भोला झाल स्थित महादेव मंदिर प्रमुख है। गाजियाबाद जनपद के खिंदौड़ा गांव स्थित झारखंडेश्वर महादेव मंदिर, सुराना गांव का प्राचीन महादेव मंदिर भी प्रसिद्ध है। हापुड़ जनपद में गढ़मुक्तेश्वर का महादेव मंदिर मुक्ति का द्वार माना जाता है।

बुलंदशहर जनपद में आहार का महादेव मंदिर देश भर में प्रसिद्ध है। खुर्जा का सिद्धेश्वर मंदिर, बुलंदशहर का राज राजेश्वर मंदिर, नोएडा में नानकेश्वर महादेव मंदिर, भाईपुरा का महादेव मंदिर आदि बहुत प्रसिद्ध है।

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