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जानें, कौन थे नल और नील जिनकी सहायता से राम की वानर सेना ने समुद्र पर बनाया था पुल?

संजीवनी टुडे 15-09-2020 18:36:40

लंका तक पहुंचने हेतु भगवान राम की वानर सेना के जरिए समुद्र पर सेतु का निर्माण करना रामायण का एक प्रमुख प्रसंग है।


डेस्क। लंका तक पहुंचने हेतु भगवान राम की वानर सेना के जरिए समुद्र पर सेतु का निर्माण करना रामायण का एक प्रमुख प्रसंग है। इस काम को दो वानर योद्धाओं नल और नील की मार्ग निर्देशन में पूर्ण किया गया था। 

पौराणिक मान्याताओं की माने तो नल और नील भगवान विश्वकर्मा के वानर बेटे माने गए हैं। प्रचलित कहानी की माने तो इन दोनों को ऋषियों ने श्राप दिया था यही श्राप आगे चलकर इनके लिए वरदान साबित हुआ। 

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प्रचलित कहानियों में बोला गया है कि नल और नील जब छोटे थे तो ऋषि-मुनियों को बहुत तंग करते थे एवं अक्सर उनकी चीजों को समुद्र में फेंक देते थे।  इन दोनों बच्चों से परेशान ऋषि-मुनियों ने तंग आकर इन्हें श्राप दिया था कि जो भी वस्तु यह पानी में फेकेंगे वह नहीं डूबेगी। 

कैसे बना सेतु 
भगवान राम जब अपनी वानर सेना संग समुद्र के तट पर पहुंच गए और उन्होंने समुद्र से उन्हें रास्ता देने हेतु प्रार्थना की किन्तु सागर ने भगावन राम की नहीं सुनी। राम ने तब सागर को सूखाने हेतु धनुष पर बाण चढ़ा लिया यह देखकर भगवान समुद्र डर गया एवं राम के सामने पेश हुए। 

समुद्र ने राम को कहा कि आपकी सेना में नल-नील नाम के वानर हैं। वे जिस भी वस्तु को हाथ लगाते हैं, वह पानी में डुबती नहीं है। आप समुद्र पर सेतु तैयार करने हेतु इन दोनों की सहायता ले सकते हैं। इसके बाद नल तथा नील की सहायता से वानर सेना समुद्र पर लंका तक सेतु बना लेते हैं। इसी सेतु की सहायता से राम और उनकी वानर सेना लंका तक पहुंच जाती है। 

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हालांकि रामायण से जुड़ी कुछ कहानियों में केवल नल का ही जिक्र आता है परन्तु तुलसीदास के जरिए लिखी गई रामचरित मानस के सुंदरकांड में सेतु निर्माण का वर्णन है जिसमें नल व नील दोनों के बारे में बताया गया है। 

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