संजीवनी टुडे

जानिए रविवार को सूर्य भगवान की कैसे करें पूजा और व्रत, कैसे दें सूर्य को अर्घ्य

संजीवनी टुडे 09-06-2019 07:46:52

हिन्दू धर्म में पौराणिक कथाओं में सूर्य को ब्रह्मांड का केंद्र माना गया है।सूर्य में तेज होता है इसलिए उनकी पूजा करनी चाहिए, ताकि आपको और आपके परिवार को ऊर्जा मिले। सूर्य भगवान की पूजा के लिए रविवार का दिन शुभ माना जाता है। वैसे तो रोजाना ही ज्यादातर लोग स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं लेकिन रविवार सूर्य देवता का दिन होता है।


डेस्क। हिन्दू धर्म में पौराणिक कथाओं में सूर्य को ब्रह्मांड का केंद्र माना गया है।सूर्य में तेज होता है इसलिए उनकी पूजा करनी चाहिए, ताकि आपको और आपके परिवार को ऊर्जा मिले। सूर्य भगवान की पूजा के लिए रविवार का दिन शुभ माना जाता है। वैसे तो रोजाना ही ज्यादातर लोग स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं लेकिन रविवार सूर्य देवता का दिन होता है। इसका अर्थ यह है कि रविवार को विशेषरुप से सूर्यदेव की ही पूजा की जाती है। मान्यता है कि रविवार के दिन नियमित रूप से सूर्यदेव के नाम का उपवास कर उनकी आराधना की जाए उपासक की सारी द्ररिद्रता दूर हो जाती है। इस दिन अगर सूर्यदेव को जल अर्पित करने के साथ साथ पूरे विधि विधान से उनकी पूजा की जाए तो उपासक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इतना ही नहीं उसके सभी रोग दूर हो जाते हैं। साथ ही रविवार के दिन सही नियम से सूर्यदेव को जल चढ़ाने से कुंडली के सारे दोष समाप्त हो जाते हैं। अगर आपके मन में कई सारी इच्छाएं और मनोकामनाएं है तो आप रविवार का व्रत कर सकते हैं। सूर्य देव का व्रत करने से सुख और शांति बनी रहती है। आइए जानते हैं सूर्यदेव की पूजा से मिलने वाले लाभ और उनकी पूजा का सही तरीका क्या है।

रविवार को सूर्यदेव की पूजा करने की विधि

तड़के सुबह उठकर नित्यक्रिया के बाद स्नान करें और लाल वस्त्र धारण करके अपने माथे पर लाल चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद तांबे के कलश में जल भरें और उसमें लाल फूल, रोली और अक्षत डालकर ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं। शाम को सूर्यास्त से पहले गुड़ का हलवा बनाकर सूर्य देवता को चढ़ाएं और इसे प्रसाद के रूप में बांटें। अगर संभव हो तो सूर्य देव की पूजा करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान दें।

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जानें कैसे करें व्रत और पूजा

- प्रतिदिन सूर्योदय से पहले ही स्नान से कर लें। 

- नहाने के बाद सूर्यनारायण को तीन बार अर्घ्य देकर प्रणाम करें। 

- संध्या के समय फिर से सूर्य को अर्घ्य देकर प्रणाम करें। 

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- सूर्य के मंत्रों का जाप श्रद्धापूर्वक करें। 

- आदित्य हृदय का नियमित पाठ करें। 

- स्वास्थ्य लाभ की कामना, नेत्र रोग से बचने और अंधेपन से रक्षा के लिए 'नेत्रोपनिषद्' का प्रतिदिन पाठ करना चाहिए। 

- रविवार को तेल, नमक नहीं खाना चाहिए तथा एक समय ही भोजन करना चाहिए। 

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जानें कैसे दें सूर्य को अर्घ्य

पौराणिक धार्मिक ग्रंथों में भगवान सूर्य के अर्घ्यदान की विशेष महत्व बताया गया है। प्रतिदिन प्रात:काल में तांबे के लोटे में जल लेकर और उसमें लाल फूल, चावल डालकर प्रसन्न मन से सूर्य मंत्र का जाप करते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर देनी चाहिए. इस अर्घ्यदान से भगवान ‍सूर्य प्रसन्न होकर आयु, आरोग्य, धन, धान्य, पुत्र, मित्र, तेज, यश, विद्या, वैभव और सौभाग्य को प्रदान करते हैं। 

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