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Janmashtami 2020: जन्माष्टमी किस दिन मनाना रहेगा लाभदायक, जानें

संजीवनी टुडे 10-08-2020 10:28:13

इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए इसे कृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है इस दिन श्री कृष्ण को प्रिय सामग्री समर्पित करने से श्री कृष्ण का विशेष आशीर्वाद मिलता है।


डेस्क। जन्माष्टमी का त्यौहार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जन्माष्टमी का पर्व 12 अगस्त को मनाया जाएगा। कुछ स्थानों पर कान्हा के जन्मदिन को 11 अगस्त को मनाया जा रहा है, लेकिन अधिकतर स्थानों पर इस पर्व को 12 अगस्त के दिन ही मनाया जा रहा है। मथुरा नगरी में असुरराज कंस के कारागृह में देवकी की आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी को पैदा हुए। उनके जन्म के समय अर्धरात्रि  थी, चन्द्रमा उदय हो रहा था और उस समय रोहिणी नक्षत्र भी था। इसलिए इस दिन को प्रतिवर्ष कृष्ण जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए इसे कृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है इस दिन श्री कृष्ण को प्रिय सामग्री समर्पित करने से श्री कृष्ण का विशेष आशीर्वाद मिलता है। श्रीकृष्ण की आराधना करने वालों के सब क्लेश दूर हो जाते हैं। दुख-दरिद्रता से उद्धार होता है। जिन परिवारों में कलह-क्लेश के कारण अशांति का वातावरण हो, उस घर के लोगो को रोजाना  श्रीकृष्ण की आरती करनी चाहिए।   

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श्रीकृष्ण जी भगवान विष्णु जी के आठवें अवतार माने जाते हैं। अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र के योग में  श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ था। जन्माष्टमी पर लोग श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं। कई लोग अपने घरों में बाल गोपाल को रखते हैं। इस दिन श्री कृष्ण की पूजा और सेवा एक छोटे बच्चे की भांति की जाती है।

Janmashtami

भादो के महीने की षष्ठी को बलराम और अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस माह में भगवान विष्णु की पूजा -अर्चना करनी चाहिए। जन्माष्टमी के पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग है। जन्माष्टमी पर राहुकाल दोपहर 12:27 बजे से 02:06 बजे तक रहेगा। जन्माष्टमी पर कृतिका नक्षत्र रहेगा, उसके बाद रोहिणी नक्षत्र रहेगा,  यह 13 अगस्त तक रहेगा।

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पूजा का शुभ समय 
रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक है।

This time Janmashtami will be celebrated on August 12 temples are being decorated

श्री कृष्ण की सेवा से घर की सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं। श्री कृष्ण के प्रसन्न होने से व्यक्ति का मन बहुत प्रसन्न रहता है।श्री कृष्ण भाव के भूखे होते हैं। वैदिक या हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में मनाया जाता है। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी तिथि नक्षत्र का संजोग नहीं मिलने के कारण 11 तथा 12 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

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