संजीवनी टुडे

अगर बचना है घोर संकट से तो शिव जी की पूजा में न करें इन चीजों को शामिल

संजीवनी टुडे 19-08-2019 08:05:50

सोमवार को जो भी पूरे विधि-विधान से शिव जी की पूजा करता है वो शिव जी का विशेष आशीर्वाद पा लेता है। सारे देवों में शिव ही ऐसे देव हैं जो अपने भक्‍तों की भक्ति-पूजा से बहुत जल्‍दी ही प्रसन्‍न हो जाते हैं। शिव भोले को आदि और अनंत माना गया है जो पृथ्वी से लेकर आकाश और जल से लेकर अग्नि हर तत्व में विराजमान हैं।


डेस्क। भोलेनाथ की पूजा के लिए सोमवार सबसे पवन दिन  माना गया है। सोमवार को जो भी पूरे विधि-विधान से शिव जी की पूजा करता है वो शिव जी का विशेष आशीर्वाद पा लेता है। सारे देवों में शिव ही ऐसे देव हैं जो अपने भक्‍तों की भक्ति-पूजा से बहुत जल्‍दी ही प्रसन्‍न हो जाते हैं। शिव भोले को आदि और अनंत माना गया है जो पृथ्वी से लेकर आकाश और जल से लेकर अग्नि हर तत्व में विराजमान हैं। शिव पूजा में बहुत सी ऐसी चीजें अर्पित की जाती हैं जो अन्‍य किसी देवता को नहीं चढ़ाई जाती, जैसे- आक, बिल्वपत्र, भांग आदि. इसी तरह शिव पूजा में कई ऐसी चीजें होती हैं जो आपकी पूजा का फल देने की बजाय आपको नुकसान पहुंचा सकती हैं...

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हल्‍दी: भगवान शिव की पूजा में हल्दी भी वर्जित है। साथ ही धार्मिक कार्यों में भी हल्दी का महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है, इसी वजह से महादेव को हल्दी नहीं चढ़ाई जाती। 

फूल: शिव को कनेर और कमल के अलावा लाल रंग के फूल प्रिय नहीं हैं।  शिव को केतकी और केवड़े के फूल चढ़ाने का निषेध किया गया है।  

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कुमकुम या रोली: शास्त्रों के अनुसार शिव जी को कुमकुम और रोली नहीं लगाई जाती है। 

शि‍व पूजा में वर्जित है शंख: भगवान शिव की पूजा में शंखनाद नहीं किया जाता और न ही शंख से उनका जलाभिषेक किया जाता है। क्योकि शंख भगवान विष्णु को बहुत ही प्रिय हैं लेकिन शिव जी ने शंखचूर नामक असुर का वध किया था इसलिए शंख भगवान शिव की पूजा में वर्जित माना गया है। 


नारियल पानी: नारियल के पानी से भगवान शिव का अभिषेक निषेध हैक्योंक‌ि नारियल को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है इसल‌िए सभी शुभ कार्य में नारियल का प्रसाद के तौर पर ग्रहण किया जाता है। लेक‌िन श‌िव पर अर्प‌ित होने के बाद नारियल पानी ग्रहण योग्य नहीं रह जाता है। 


तुलसी दल: तुलसी का पत्ता भी भगवान श‌िव को नहीं चढ़ाना चाहिए। इस संदर्भ में असुर राज जलंधर की कथा है ज‌िसकी पत्नी वृंदा तुलसी का पौधा बन गई थी। श‌िव जी ने जलंधर का वध क‌िया था इसल‌िए वृंदा ने भगवान श‌िव की पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग न करने की बात कही थी। 

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तिल: भगवान शिव की पूजा में कभी भी तिल नहीं चढ़ाया जाता। शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ था। इसलिए भगवान विष्णु को तिल अर्पित किया जाता है लेकिन भगवान शिव जी को तिल अर्पित नहीं किया जाता।

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