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प्रभु यीशु के बलिदान की सालगिरह का महानतम दिन है गुड फ्रायडे, जानें सूली दिए जाने की 5 खास बातें

संजीवनी टुडे 10-04-2020 08:21:00

ईसाई धर्म के अनुयायी गुड फ्राइडे के दिन चर्च जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं। गुड फ्राइडे को वह शोक दिवस के रूप में मनाते हैं। प्रेम, ज्ञान व अहिंसा का संदेश देने वाले प्रभु यीशु को इस दिन सूली पर चढ़ा दिया गया था। गुड फ्राइडे के तीसरे दिन यानि रविवार को ईस्टर डे मनाया जाता है। इस दिन ईसा मसीह का पुनर्जीवित हुए थे।


डेस्क। ईसाई धर्म के अनुयायी गुड फ्राइडे के दिन चर्च जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं। गुड फ्राइडे को वह शोक दिवस के रूप में मनाते हैं। प्रेम, ज्ञान व अहिंसा का संदेश देने वाले प्रभु यीशु को इस दिन सूली पर चढ़ा दिया गया था। गुड फ्राइडे के तीसरे दिन यानि रविवार को ईस्टर डे मनाया जाता है। इस दिन ईसा मसीह का पुनर्जीवित हुए थे। ईसाई समुदाय के सबसे बड़े पर्व के करीब आने के साथ ही ईश्‍वर के पुत्र ईसा मसीह को लेकर तमाम हैरतअंगेज बातों का जिक्र चल पड़ता है। जीसस क्राइस्ट यानी ईसा मसीह के बारे में कहा जाता है कि यहूदियों को ईसा की बढ़ती लोकप्रियता से तकलीफ होने लगी। उन्हें लगने लगा कि ईसा उनसे सत्ता न छीन लें। इसलिए साजिश के तहत इन्हें सूली पर चढ़ा दिया गया। इस बार 10 अप्रैल को गुड फ्राइडे और 12 अप्रैल 2020 को ईस्टर है। गुड फ्राइडे को ईसा मसीह को सूली पर लटका दिया गया था और ईस्टर को वे पुन: जीवित हो गए थे। गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे भी कहते हैं। आओ जानते हैं सूली दिए जाने की 5 खास बातें।

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ईसाइयों की पवित्र पुस्तक बाइबिल- यूहन्ना के अनुसार 

कहां पर दी थी सूली: यीशु मसीह परमेश्वर थे। यही बात आज का यीशुई धर्म का आधार है। उन्होंने स्वयं कहा मैं हूँ।  ईसा मसीह जिस जगह पर सूली चढ़ाया गया था उस स्थान को गोलगोथा नाम से जाना जाता है। यह जगह इसराइल की राजधानी यरुशलम में ईसाई क्षेत्र में है। इसे ही हिल ऑफ़ द केलवेरी कहा जाता है। इस स्थान पर चर्च ऑफ फ्लेजिलेशन है। होली स्कल्प्चर से चर्च ऑफ फ्लेजिलेशन तक के मार्ग को दुख या पीड़ा का मार्ग माना जाता है। यात्रा के दौरान 9 ऐतिहासिक और पवि‍त्र स्थल हैं। चर्च ऑफ फ्लेजिलेशन को वह स्थान माना जाता है, जहां सार्वजनिक रूप से यीशु की निंदा हुई और उन्हें गोलगोथा की पहाड़ी पर क्रॉस पर चढ़ा दिया गया।

क्यों दी थी सूली :  पवित्र पुस्तक बाइबिल- यूहन्ना के अनुसार प्रभु यीशु पर 3 आरोप लगे थे। सबसे बड़ा आरोप यह था था कि वह खुद को मसीहा और ईश्वर का पुत्र कहते थे। यहूदियों के धर्मगुरुओं को यह अच्‍छा नहीं लगा और उन्होंने इसकी शिकायत रोमन गवर्नर पिलातुस से की। पिलातुस को यीशु में कोई खोट नहीं नजर आई। तब भी रोमी टुकड़ी के सिपाहियों और उनके सूबेदारों तथा यहूदियों के मन्दिर के पहरेदारों ने यीशु को बंदी बना लिया। वे उसे लेकर अंत में पिलातुस के पास लाए।

 कैसे दी सूली : यहूदियों के दबाव के चलते पिलातुस ने यीशु को कोड़े लगवाए। सिपाहियों कंटीली टहनियों को मोड़ कर एक मुकुट बनाया और उसके सिर पर रख दिया। फिर उन्हें एक बड़ा सा क्रूस दिया गया जिसे लेकर उन्हें उस स्थान पर जाना था जहां सूली दी जाती है। इसे गुलगुता (खोपड़ी का स्थान) कहा जाता था। संपूर्ण रास्ते में उन्हें कोड़े मारे गए और अंत में वे वहां पहुंचे और सभी के सामने दो लोगों के साथ सूली पर लटका दिया। यीशु के क्रूस के पास उसकी मां, मौसी क्लोपास की पत्नी मरियम, और मरियम मगदलिनी खड़ी थी।

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सूली पर से उतारने के बाद कहां रखा गया : जानकारी के अनुसार ईसा मसीह को सूली पर से उतारने के बाद उनका एक अनुयायी शव को ले गया और उसने शव को एक गुफा में रख दिया गया था। उस गुफा के आगे एक पत्थर लगा दिया गया था। वह गुफा और पत्थर आज भी मौजूद है। इसे खाली कब्र कहा जाता है। बाद में उनके शव को विधिवत रूप से दूसरी ओर दफनाया गया।

कहां दफनाया गया : यरुशलम के प्राचीन शहर की दीवारों से सटा एक प्राचीन पवित्र चर्च है जिसके बारे में मान्यता है कि यहीं पर प्रभु यीशु पुन: जी उठे थे। जिस जगह पर ईसा मसीह फिर से जिंदा होकर देखा गए थे उसी जगह पर यह चर्च बना है। इस चर्च का नाम है- चर्च ऑफ द होली स्कल्प्चर। स्कल्प्चर के भीतर ही ईसा मसीह को दफनाया गया था। माना यह भी जाता है कि यही ईसा के अंतिम भोज का स्थल है।

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