संजीवनी टुडे

मंगलवार के दिन मंदिर में जाकर अवश्य करें इस चालीसा का जाप, हर संकट हो जायेंगे दूर

संजीवनी टुडे 03-12-2019 08:06:15

हनुमान चालीसा


                 हनुमान चालीसा

                    ॥ दोहा ॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।

बरनऊँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

Chalisa


बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवनकुमार ।

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥


                       चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥

राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनिपुत्र पवनसुत नामा ॥


महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥

Chalisa
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥

संकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥


विद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥


सूक्श्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचंद्र के काज सँवारे ॥


लाय सजीवन लखन जियाये । श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥


सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥

Chalisa
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥


तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना । लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥

जुग सहस्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥

दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥


राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रच्छक काहू को डर ना ॥

Chalisa
आपन तेज संहारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥


नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥

संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥


सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥

और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ॥


चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥

साधु संत के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥

राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥


तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥

अंत काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥


और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेई सर्ब सुख करई ॥

संकट कटै मिटै सब पीरा ॥ जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥


जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरु देव की नाईं ॥

जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बंदि महा सुख होई ॥

Chalisa
जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ॥


                     ॥ दोहा ॥

पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

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