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Ganga Dussehra 2019: 75 साल बाद बना है दिव्य योग, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि

संजीवनी टुडे 12-06-2019 10:49:28

गंगा भारत में बहने वाली एक नदी है। हिन्दू धर्म में इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह उत्तराखंड के गंगोत्री से निकलती है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि बुधवार 12 जून को पूरे देश में गंगा अवतरण दिवस यानी गंगा दशहरा श्रद्धाभाव से मनाया जाएगा


डेस्क। गंगा भारत में बहने वाली एक नदी है। हिन्दू धर्म में इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह उत्तराखंड के गंगोत्री से निकलती है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि बुधवार 12 जून को पूरे देश में गंगा अवतरण दिवस यानी गंगा दशहरा श्रद्धाभाव से मनाया जाएगा। माना जाता है कि, इसी दिन गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था। इस दिन गंगा स्नान, गंगा जल का प्रयोग, और दान करना विशेष लाभकारी होता है। इस खास मौके पर अगर आप गंगा के तट पर जाने से असमर्थ हैं तो आप घर पर ही विधिवत रूप से पूजा कर सकते हैं जानिए कैसे घर पर गंगा दशहरा पर पूजा करें। 

ऐसे करें घर पर गंगा दशहरा पर पूजा करें। 

-घर में ही शीतल जल व गंगा जल से में थोडा सा -गंगाजल मिलाएं या तुलसी के पत्ते डालकर स्नान करें।

-ध्यान रहे कि स्नान करते हुए मां गंगा का ध्यान लगाएं और स्नान मंत्रों का उच्चारण करें।

-नहाने के दौरान 'ऊँ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः' का जाप करें। 

-इसके बाद आप व आपके परिवार के सदस्य सूर्य देवता को जल दें। 

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- घर के पूजा स्थल में गंगा मैया की प्रतिमा स्थापित करें। 
- गंगा मां को जल, फूल, फल व धूप अर्पित करें
 
- मां गंगा की पूजा के दौरान गंगा मैया के मन्त्रों का जाप करें। 
-पूजा करने के बाद इस दिन जरूर निर्धन व्यक्ति या ब्राह्मण को दान करें। क्योंकि इस दिन स्नान के अलावा दान का खास महत्व होता है। 

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गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त :
ऋषि स्नान : प्रात: काल 4.15 से सुबह 5.25 बजे
सामान्य स्नान : सुबह से शाम तक 

गंगा का पौराणिक महत्व क्या है ?

माना जाता है कि गंगा श्री विष्णु के चरणों में रहती थीं. भागीरथ की तपस्या से, शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया. फिर शिव जी ने अपनी जटाओं को सात धाराओं में विभाजित कर दिया. ये धाराएं हैं - नलिनी, हृदिनी, पावनी, सीता, चक्षुष, सिंधु और भागीरथी. भागीरथी ही गंगा हुई और हिन्दू धर्म में मोक्षदायिनी मानी गई। इन्हें कहीं-कहीं पार्वती की बहन कहा जाता है. इन्हें शिव की अर्धांगिनी भी माना जाता है और अभी भी शिव की जटाओं में इनका वास है। 

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75 साल बाद बना हैं दिव्य योग

जानकारी के अनुसार आपको बता दें कि गंगा दशहरा पर 75 साल बाद 10 दिव्य योग का संयोग बन रहा है। दस योग में ज्येष्ठ योग, व्यतिपात योग, गर करण योग, आनंद योग, कन्या राशि के चंद्रमा व वृषभ राशि के सूर्य की दशा में महायोग बन रहा है। ज्योतिषी इसे दस योग बता रहे हैं। इसलिए गंगा में नहाकर आइए और दस प्रकार के पापों से छुटकारा पाइए। 

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