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शारदीय नवरात्र आज से शुरू, भूलकर भी न करें ये काम, वरना...

संजीवनी टुडे 17-10-2020 08:23:39

नवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है। नवरात्रि का पर्व देवी शक्ति मां दुर्गा की उपासना का उत्सव है। आज से लेकर पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग नौ शक्ति स्वरूपों की पूजा की जाती है।


डेस्क। नवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है। नवरात्रि का पर्व देवी शक्ति मां दुर्गा की उपासना का उत्सव है। आज से लेकर पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग नौ शक्ति स्वरूपों की पूजा की जाती है। नौ दिवसीय शारदीय नवरात्र 17 से शुरू होकर 25 अक्टूबर तक चलेंगे।नवरात्रि वर्ष में चार बार पड़ती है - माघ, चैत्र, आषाढ़ और आश्विन। इसमें सबसे शक्तिशाली नवरात्रि आश्विन की मानी जाती है, इसको शक्ति अर्जन का पर्व कहा जाता है। इन दिनों में मां को प्रसन्न करने के लिए भक्तजन व्रत व पूजा अनुष्ठान करते है। 

Navratri

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों मां के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना करने से घर में सुख शांति बनी रहती है और मां भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। नवरात्रि के नौ दिन तक व्रत रखने को लेकर कुछ नियम व धार्मिक मान्यताएं भी हैं जिनका पालन किया जाना आवश्यक होता है। नियमों के विपरीत करने पर देवी माता रुष्ठ हो सकती हैं। शास्त्रों के अनुसार अगर इन नियमों का पालन करने माता रानी की कृपा मिलती है और मनोकामना पूरी होती है। जाने किन नियमों का पालन करना जरूरी है.....

धार्मिक बातों में मन लगाएं: माना जाता है कि व्रत करने वाले को नवरात्रि नौ दिनों तक अपना समय फिज्यूल की बातों में न लगाकर धार्मिक ग्रंथों का अध्यन करना चाहिए। इन दिनों दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तसती का पाठ कर सकते हैं।

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घर अकेला न छोड़ें: अगर आप नवरात्रि में अगर अखंड ज्योत जला रहे हैं तो घर खाली छोड़कर बिल्कुल न जाएं।  यानी घर में किसी न किसी का होना बहुत जरूरी है। साथ व्रत के दिनों में दिन में सोना भी मना है।

लहसुन प्याज का सेवन न करें: नौ रात्रों में घर के अन्दर लहसुन और प्याज प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। इन पावन दिनों में सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आहार, व्यवहार और विचार में आपके सात्विकता होना जरूरी है तभी नवरात्रि के व्रत कापूरा लाभ मिल सकेगा। आप इन दिनों प्याज लहसुन और मांस मदिरा का सेवन ना करें। नवरात्रि के नौ दिनों तक पूर्ण सात्विक आहार लेना चाहिए।

कन्याओं का दिल न दुखाएं: भारतीय परंपरा में कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना गया है। यही कारण है कि नवरात्रि में कन्या पूजन या कंजका पूजन कर लोग पुण्य की प्राप्ति करते हैं। माना जाता है नवरातों दौरान किसी भी कन्या या महिला के प्रति असम्मान का भाव न आने दें। शास्त्रों में यहां तक कहा गया है कि यत्र नार्यास्तु पूजयंते रमंते तत्र देवता। किसी भी कन्या का अपमान होने पर मां दुर्गा नाराज हो सकती हैं।

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कलह से दूर रहें: नवरात्र के दौरान दुर्गा मां की कृपा पाने के लिए घर में कलह का माहौल बिल्कुल नहीं होना चाहिए। लड़ाई-झगड़े और वाद-विवाद से बचना चाहिए। 
क्योंकि कलह से व्रतधारी की आत्मा को दुख पहुंचता है जिससे देवी मां रुष्ठ हो सकती हैं। ऐसे में कोशिश करें कि हर प्रकार के वाद विवाद से दूर रहें। श्रीराम चरित मानस में भी ऐसा कहा गया है कि "जहां सुमति तहां संपति नाना। जहां कुमति तहां विपति निदाना।" लड़ाई झगड़े वाले घर में लक्ष्मी नहीं ठहरतीं।

काम वासना पर काबू रखें: नवरात्रि के दिनों में काम भावना पर नियंत्रण रखना अतिआवश्यक हैं। इन दिनो में महिलाओं और पुरुष दोनो को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। मां की पूजा अर्चना साफ मन से करने से ही मां प्रसन्न होती है इसलिए इन दिनों शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए।

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