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हारे हुए सरपंच प्रत्याशी को मिलेगी जनता पेंशन

संजीवनी टुडे 27-10-2020 18:14:52

हारे हुए सरपंच प्रत्याशी को मिलेगी जनता पेंशन


झुंझुनू। आपने सरकारी कर्मचारियों, पूर्व जनप्रतिनिधियों को  पेंशन मिलती है यह सुना होगा। लेकिन झुंझुनू जिले में एक हारे हुए सरपंच प्रत्याशी को गांव के लोग पेंशन देंगे। वो भी 15 हजार रुपए महीना। जी हां यह सच है। झुंझुनू जिले के दोरासर ग्राम पंचायत में सरपंच का चुनाव लड़ने वाले एक प्रत्याशी को गांव के लोगों ने ना केवल पांच लाख रुपए की नकद आर्थिक सहायता दी है। बल्कि उनकी हर माह 15 हजार रुपए पेंशन देना भी तय किया है। 

मोबीलाल मीणा ने झुंझुनू जिले की दोरासर ग्राम पंचायत में सरपंच का चुनाव लड़ा था। लेकिन चुनाव नहीं जीत पाए। पर मोबीलाल मीणा आज भी गांव के दिलों पर राज करते है। यही कारण है कि गांव के लोगों ने उन्हें सहायता देने का मन बना लिया है और हर माह 15 हजार रुपए की पेंशन शुरू कर दी है। पंचायत के वार्ड नंबर एक से पंच ने बताया कि मोबीलाल मीणा पिछले 12 सालों से गांव में राशन बांट रहे है। लेकिन जब जनवरी 2020 में चुनाव की रणभेरी बजी थी। तभी नामांकन के दौरान आपत्ति होने पर उन्होंने राशन डीलर का काम छोड़ दिया था। लेकिन अब अक्टूबर में जब चुनाव हुए तो वे चुनाव हार गए। वार्ड नं.2 के राजेश ओला ने बताया कि ग्रामीणों ने मोबीलाल मीणा को पांच लाख रुपए बतौर संबल देने के लिए दिए है। वहीं तय किया है कि हर माह उन्हें 15 हजार रुपए दिए जाएंगे। ताकि उनका घर खर्च चल सके।

मोबीलाल मीणा बताते है कि वे पहले भी गांव के 1995 से 2000 तक सरपंच रह चुके है। इसके बाद वे 2008 से राशन डीलर का काम कर रहे है और घर खर्च चला रहा है। इस बार फिर से ग्राम पंचायत एसटी के लिए आरक्षित हुई तो ग्रामीणों की भावनाओं के कारण उन्होंने चुनाव लड़ा। लेकिन नियम कायदों के कारण उन्हें अपनी रोजी रोटी का साधन राशन डीलरशिप छोड़नी पड़ी। लेकिन उन्हें खुशी है कि ग्रामीणों ने कहा है कि जब तक मोबीलाल को कोई रोजगार नहीं मिल जाता है या फिर उनके परिवार में जब तक कोई रोजगार नहीं आता है। तब तक 15 हजार रुपए महीने का देंगे। ताकि मेरे परिवार के सामने रोटियों के लाले ना पड़े।

गांव के वरिष्ठ अध्यापक पुष्कर मीणा ने बताया कि मोबीलाल ने आनन फानन में गांव की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए डीलर से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बताया कि मोबीलाल साफ छवि और स्वच्छ कार्यकाल का प्रमाण है। लेकिन चुनावों की राजनीति में जरूर चुनाव हार गया हो पर गांव के दिल में अभी भी राज है। गांव के लोगों ने फैसला लिया है कि जब तक मोबीलाल या फिर उसके परिवार को रोजगार नहीं मिलेगा। गांव के लोग आर्थिक रूप से मोबीलाल को टूटने नहीं देंगे।

मोबीलाल मीणा चाहे सरपंच का चुनाव हार गया हो। लेकिन आने वाले दिनों में गांव के लोग मोबीलाल मीणा को पंचायत समिति सदस्य पद का चुनाव भी लड़ाने का मानस बना चुके है। साथ ही तय कर चुके है कि मोबीलाल को क्षेत्र का प्रतिनिधित्व तो देंगे ही। साथ ही मोबीलाल मीणा को उसकी आर्थिक स्थिति की कमी कभी आड़े नहीं आने देंगे। संभवतया प्रदेश में मोबीलाल मीणा पहले सरपंच प्रत्याशी है। जिनके हारने के बाद भी गांव के दिलों में वे ना केवल मन से राज करते है। बल्कि धन के मामले में भी ग्रामीण मोबीलाल के साथ खड़े है।

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