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कोरोना की मार: इस बार दशहरे पर नहीं होंगें रावण दहन, मेले एवं अन्य कार्यक्रमों का आयोजन

संजीवनी टुडे 24-10-2020 17:10:58

असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माने जाने वाले विजयादशमी पर्व पर इस बार कोरोना की मार दिखाई दे रही है।


जयपुर। असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माने जाने वाले  विजयादशमी पर्व पर इस बार कोरोना की मार दिखाई दे रही है। कोरोना माहमारी के चलते निषेधाज्ञा लागू होने से राजधानी जयपुर में इस अवसर पर आयोजित रावण दहन पर मेले एवं अन्य भव्य कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा रहा है, जिससे इस बार लोग बडे रावण के पुतले दहन होते नहीं देख पाएंगे। इसके अलावा जयपुर शहर में विद्याधर नगर स्टेडियम, वैशाली नगर, आदर्श नगर, मानसरोवर सहित कई स्थानों पर इस मौके आयोजित होने वाले दशहरा मेले नहीं होंगे।

रावण बनाने वाले कारीगर इस बार नजर आ रहे है मायूस 
राजधानी जयपुर के ​विभिन्न जगहों पर अपनी आजीविका के लिए मानसरोवर रोड़ रावण मंडी, चौमूं पुलिया, अल्का टाकिज, कावंटिया अस्पताल चौराहा, दादीका फाटक, झारखंड मंदिर मोड़, वैशाली नगर, गुर्जर की थड़ी,पुरानी चुंगी,सुशीलपुरा नाला एवं मालवीय नगर सहित कई स्थानों पर रावण एवं उसके परिजनों के हजारों की संख्या में रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं।

लेकिन महंगाई के कारण इस बार जहां पुतले बनाने की सामग्री महंगी हो गई वहीं कोरोना के कारण उन्हें पुतले बेचने में बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा हैै। जयपुर के लक्ष्मीमंदिर तिराहा के पास रावण के पुतले बना रहे कारीगर किशन ने बताया कि इस बार उन्होंने सौ-सवा सौ पुतले बनाये ,लेकिन कोरोना के कारण निषेधाज्ञा लागू होने से केवल 15-20 पुतले ही बिक पाये हैं और  इस बार पांच से दस फीट के ही रावण बिक रहे है।

लालकोठी के पास कारीगर प्रकाश ने बताया कि दहशरे को देखते हुए छोटे पुतले बनाए गए। लेकिन खरीददार कम एवं उचित दाम नहीं मिलने से इस बार भी कोई लाभ पहुंचने वाला नहीं लगता। उन्होंने सरकार से मांग​ कि है उनकी कोरोना माहमारी के चलते कुछ न कुछ  मदद करनी चाहिए। कोरोना के मद्देनजर लोगों को जागरूक करने के लिए कारीगरों ने इस बार कोरोना रावण के पुतले भी बनाएं है। कोरोना रावण पुतलों को लोग पसंद कर रहे है।

रंगीन पन्नियां, पेपर, मेदा एवं बांस आदि महंगे
कारीगर प्रभुलाल का कहना है कि इस बार रंगीन पन्नियां, पेपर, मेदा एवं बांस आदि महंगे मिले हैं जबकि पुतलों की कीमत नहीं मिल रही हैं। इस बार सबसे ऊंचा पुतला करीब 15 फुट का बनाया और उसे आधे से भी कम कीमत करीब आठ सौ में बेचने को तैयार हैं लेकिन खरीददार नहीं मिल रहे हैं। पिछली बार उन्होंने छोटे बड़े 250 पुतले बनाए थे। वहीं इस बाद कोरोना के कारण रावण के पुतलों की मांग बहुत कम नजर आ रही है और कोरोना के कारण इस बार बड़े रावण के पुतले बनाने का एक भी ऑर्डर नहीं मिला। रावण दहन के बड़े आयोजन नहीं होने से रावण के पुतले बनाने वाले लोग मायूस नजर आ रहे है। 

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