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कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों के भारत बंद का समर्थन करेगी कांग्रेस : सूरजेवाला

संजीवनी टुडे 25-09-2020 16:22:42

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव रणदीप सुुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार के कृषि संबंधी तीन विधेयकों के खिलाफ देश के किसानों में पनप रहे गुस्से के बीच कांग्रेस हर कदम किसानों के साथ खड़ा रहेगी।


जयपुर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव रणदीप सुुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार के कृषि संबंधी तीन विधेयकों के खिलाफ देश के किसानों में पनप रहे गुस्से के बीच कांग्रेस हर कदम किसानों के साथ खड़ा रहेगी। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों के कारण किसानों की स्थिति पहले से खराब हो जाएगी। ये कृषि विधेयक देश के किसान और खेत-खलिहान के खिलाफ घिनौना षड्यंत्र हैं।

एआईसीसी महासचिव सूरजेवाला शुक्रवार दोपहर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, जन घोषणा पत्र क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष ताम्रध्‍वज साहू और अमरसिंह तथा कांग्रेस प्रदेशाध्‍यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा  भी मौजूद रहे। सूरजेवाला ने कहा कि केन्द्र सरकार की ओर से पेश किए गए कृषि विधेयक किसान विरोधी है। कृषि विधेयकों को देश के किसान और खेत खलिहान के खिलाफ घिनौना षड्यंत्र करार देते हुए सूरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस इनके खिलाफ भारत बंद में देश के अन्नदाता के साथ अडिग खड़ी है। उन्होंने मोदी सरकार के कृषि संबंधी विधेयकों को काला कानून करार दिया। 

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने तीन काले कानूनों के माध्यम से किसान, खेत मजदूर और आजीविका पर क्रूर तथा कुत्सित हमला बोला है। देश में कोरोना, सीमा पर चीन और खेत खलिहान पर मोदी जी ने हमला बोल रखा है। आज पूरे देश में किसान और खेत मजदूर ने भारत बंद का आह्वान किया है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नेतृत्व में पार्टी इस भारत बंद में देश के अन्नदाता के साथ अडिग खड़ी है। 

इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि इन फासीवादी लोगों का लोकतंत्र में विश्वास नहीं है, इसलिए वे ऐसे काम करते रहते हैं जिनसे लोगों का ध्यान बंटे। संसद में जिस तरह से इन तीन विधेयकों को पारित किया गया वह शर्मनाक है। गहलोत ने कहा कि केन्‍द्र सरकार के जनविरोधी फैसलों के कारण आज पूरा देश सड़कों पर है। चाहे नोटबंदी हो, जीएसटी या फिर कृषि बिल की बात हो, सभी काम बिना किसी से सलाह के हो रहे हैं। राज्य में जिन कृषि मंडियों को बनने में 40 साल लग गए। उन्हें आप एक झटके में उखाड़ फेकने का निर्णय कर रहे हैं। बड़े-बड़े व्यापारियों को छूट दे रह हो। जो मर्जी हो कर सकते हो।

उन्‍होंने कहा कि जो केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ वादाखिलाफी कर सकती है, वो सरकार कैसे कह रही है कि किसानों के आपस में जो कोई मनमुटाव होगा, विवाद होगा तो एसडीओ और कलक्टर को अपील की जा सकती है। आप कल्पना कीजिए कि किसान और व्यापारी का कोई विवाद हो गया, अभी तो कृषि मंडी की समिति में अपील पर ही निपट जाती है। अब अगर कोई विवाद हो गया तो पहले जाओ एसडीओ के पास में फिर जाओ कलक्टर के पास में अपील करो, क्या कलक्टर-एसडीओ के पास में टाइम है? पहले से ही दबाव के अंदर हैं। सारे प्रोविजन किए गए हैं वो किसान विरोधी हैं, मंडियां समाप्त हो जाएंगी और मुझे बहुत बड़ी बर्बादी के लक्षण दिख रहे हैं। 

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