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संविदा के मुद्दे पर युवाओं की राय लेती नजर आई प्रियंका गांधी, सरकार में आने पर उचित नीति लाने का दिया आश्वासन

संजीवनी टुडे 17-09-2020 14:39:32

प्रियंका ने कहा कि मेरा मानना है कि युवाओं की बात सुननी पड़ेगी और उनके मुद्दों के लिए हमें सड़क से लेकर सदन तक इन मुद्दों पर लड़ना होगा। कांग्रेस पार्टी इसमें पीछे नहीं हटने वाली।


लखनऊ। कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका वाड्रा ने 2016 के 12,460 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों से गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग पर बातचीत की। ये बातचीत प्रियंका द्वारा हाल ही में शुरू किए गए युवाओं के साथ रोजगार पर संवाद का हिस्सा है। उन्होंने संविदा के मुद्दे पर भी युवाओं की राय ली और आश्वस्त किया हम सरकार में आते ही ऐसी नीति लाएंगे जिसमें संविदा नहीं बल्कि सम्मान हो। 

priyanka gandhi

प्रियंका ने कहा कि मेरा मानना है कि युवाओं की बात सुननी पड़ेगी और उनके मुद्दों के लिए हमें सड़क से लेकर सदन तक इन मुद्दों पर लड़ना होगा। कांग्रेस पार्टी इसमें पीछे नहीं हटने वाली। वर्ष 2016 में 12,460 शिक्षक भर्ती में शून्य जनपद के अभ्यर्थी अब तक नियुक्ति से वंचित हैं। इस शिक्षक भर्ती विज्ञापन में 51 जिलों में पद थे। लेकिन, 24 जिलों में पद शून्य थे। बीते तीन साल से शून्य जनपद वाले अभ्यर्थी कोर्ट- कचहरी के चक्कर काट रहे हैं। 

priyanka gandhi

वीडियो कांफ्रेंसिंग में एक महिला अभ्यर्थी ने महासचिव से बातचीत में बताया कि जब 2016 में उन्होंने परीक्षा दी थी, चयन के बाद बहुत खुश थीं। लेकिन, आज तक नियुक्ति नहीं हुई। उनके पास दो छोटे छोटे जुड़वे बच्चे हैं, उनकी चिंता रहती है। वे नौकरी न मिलने पर लगभग दो साल तक अवसाद में थीं। 

priyanka gandhi

एक अन्य अभ्यर्थी ने तीन साल से धक्के खाने की बात कही। बताया कि उसने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का काम शुरू किया था अब कोरोना काल में वह भी बंद है। घर का एक सदस्य प्राइवेट नौकरी करता है लेकिन अब उनकी भी नौकरी छूट चुकी है। दो अन्य अभ्यर्थियों ने कहा कि नौकरी न मिलने से उनकी शादी टूट गई।

priyanka gandhi

कांग्रेस महासचिव ने अभ्यर्थियों की बातों को सुना। उन्होंने वादा किया कि वे हर सम्भव मदद करेंगी। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं का मसला है। यह न्याय का सवाल है। वहीं उन्होंने पांच साल संविदा को लेकर कहा हम ऐसी नीति लाएंगे जिसमें युवाओं का अपमान करने वाला संविदा कानून नहीं बल्कि सम्मान के कानून हो। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपमान का घूंट पीना पड़ रहा है।

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