संजीवनी टुडे

बेहद संघर्षपूर्ण होगा इस बार का लोकसभा चुनाव

संजीवनी टुडे 30-03-2019 16:16:22


लोकसभा चुनाव में इस बार पूर्णिया में टक्कर आर- पार की होगी । चुनाव बहुत ही ज्यादा संघर्ष भरा होगा ।कुल 16 प्रत्याशियों में से महागठबंधन के उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह ,जो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं तथा एनडीए के युवा चेहरे पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा के बीच मुख्य लड़ाई होनी है। 

लोग संतोष कुशवाहा में नरेंद्र मोदी को देख रहे हैं तो उदय सिंह में राहुल गांधी को।तीसरी ओर जितेंद्र उरांव बसपा से लड़ रहे हैं ।जनता अभी अपने पत्ते खोल नहीं पा रही ।अधिकतर लोग पेशोपेस में हैं।पूर्णिया लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरण पहला पक्ष है,उसके बाद दूसरा पक्ष पार्टी या व्यक्ति है।

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पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र में कुल 7 विधानसभा क्षेत्र हैं जिसमें पूर्णिया पूर्व ,बायसी(अब किशनगंज) ,अमौर (अब किशनगंज)बनमनखी, धमदाहा, रुपौली तथा कसबा ।इस लोकसभा क्षेत्र में कटिहार के एक और विधानसभा क्षेत्र कोढा को पिछले लोकसभा चुनाव में शामिल किया गया था जो इस बार भी है। पूर्णिया के सातों विधानसभा क्षेत्रों में से धमदाहा और रुपौली -जदयू ,पूर्णिया व बनमनखी- भाजपा, कसबा तथा अमौर- कांग्रेस व बायसी राजद की सीट है।कोढ़ा (कटिहार)की सीट कांग्रेस की है।

कुलमतदाता --
पूर्णिया लोकसभा में सीट में कुल 18,19,468 मतदाता हैं जिसमें से पुरुष मतदाता 9,13,880 तथा महिला मतदाता 9,06,038 तथा अन्य 50 हैं।कुल 1758 मतदान केंद्र हैं।
विधानसभावार मतदाता---
1--पूर्णिया (62)/मतदान केंद्र-298/पुरुष-1,59,628/महिला-1,44,356/अन्य-8/कुल--303,992
2--कसबा (58)/मतदान केंद्र-274/पुरुष -1,46,082/महिला-1,35,858/अन्य-12 /कुल--2,81,952
3-बनमनखी(59)/मतदान केंद्र--301/पुरुष-1,54,970/महिला-1,44,301/अन्य-7/कुल--2,99,278
4-रुपौली(60)/मतदान केंद्र-306/पुरुष-1,56,960/महिला-1,45,654/अन्य-7/कुल-3,02,627
5-धमदाहा(61)/मतदान केंद्र-317/पुरुष-1,58,502/महिला-1,48,833/अन्य-7/कुल-3,07,342
6-कोढ़ा (कटिहार)मतदान केंद्र-262/पुरुष-1,37,738/महिला-1,87,036/अन्य-3/कुल--3,24,777
कब कौन रहे सांसद--
पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र में 1957 ,1962 ,1967 में कांग्रेस से फनी गोपाल सेन सांसद रहे।1971 में कांग्रेस से मोहम्मद ताहिर तो 1977 में बीएलडी से लखनलाल कपूर तथा 1980 एवं 1984 में कांग्रेस से माधुरी सिंह सांसद रहीं। 1989 में राजद से मोहम्मद तस्लीम उद्दीन को यहां की जनता ने चुना फिर 1996 में समाजवादी पार्टी से पप्पू यादव चुने गए। 1998 में भाजपा से जय कृष्ण मंडल तथा 1999 में पुनः निर्दलीय के रूप में राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को जनता ने कमान सौंपी।फिर 2004 एवं 2009 में उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह को पूर्णिया की जनता ने चुना। 2014 में युवा चेहरा बायसी विधानसभा के भाजपा विधायक संतोष कुशवाहा ने उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह को एक बड़े अंतर से हराकर अपना परचम लहराया।
पूर्णिया संसदीय क्षेत्र --पूर्णिया संसदीय क्षेत्र या पूर्णिया जिला एक प्रमंडलीय मुख्यालय है तथा कोसी के इलाके के 7 जिले सहरसा, मधेपुरा, सुपौल ,अररिया, किशनगंज, कटिहार की अपेक्षा सबसे बड़ा जिला तथा सबसे विकसित जिले में आता है । पूर्णिया जिला से ही कट कर अररिया और किशनगंज जिले का निर्माण हुआ है ।अगर देखा जाए तो पूर्णिया जिला उत्तर पूर्व भारत का एक बड़ा कॉरीडोर है। इस जिले से अंतरराष्ट्रीय सीमा काफी नजदीक है।यहां से नेपाल ,भूटान व बांग्लादेश की सीमा लगती है।पूर्णिया जिले के पूर्वी छोर पर किशनगंज व बंगाल का इलाका है तो दक्षिणी छोर पर कटिहार तथा भागलपुर का इलाका है ।वहीं पूर्णिया के पश्चिम में मधेपुरा स्पर्श करता है तो उत्तर में अररिया व सुपौल की चौहद्दी पूर्णिया को छूती है।

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पूर्णिया व्यावसायिक दृष्टिकोण से एक आर्थिक केंद्र माना जाता है ।अपने आसपास के सभी जिलों की अपेक्षा में यहां पर गुलाबबाग की मंडी है जो बिहार की बड़ी मंडियों में एक है और 200 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार यहां से हर महीने होता है। यात्रा सुविधा की देखें तो यहां से रेल दूसरे नंबर पर तथा बस की सुविधा वर्तमान में बहुत अच्छी है ।पटना से 300 किलोमीटर की दूरी पर बसे पूर्णिया किसी न किसी रूप में उपेक्षा का शिकार तो है। पूर्णिया की मुख्य फसल फिलहाल मक्का, मखाना और केले की खेती है। गेहूं और चावल की अच्छी पैदावार भी यहां है।बाढ़ की त्रासदी यहां के कई इलाके को हर वर्ष झेलनी पड़ती है।

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हाल के दिनों में पूर्णिया ने पहले की अपेक्षा विकास के नए कीर्तिमान रचने में कुछ सफलता तो पाई है।
यहां पर भोला पासवान कृषि महाविद्यालय ,पूर्णिया यूनिवर्सिटी ,मेडिकल कॉलेज की नींव रखी जानी है। कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन, पूर्णिया से होकर सिक्स लेन का गुजारना, पूर्णिया मंडल कारागार का सेंट्रल जेल में तब्दील होना ,ब्रीडिंग सेंटर, एसएसबी का कैंप कार्यालय होना ,कला के क्षेत्र में नए मुकाम को छूना मुख्य है ।पूर्णिया में सामरिक दृष्टिकोण से यहां के चूनापुर सैन्य हवाई अड्डे का भी काफी महत्व है।
 

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