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भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था : सुब्रमण्यम स्वामी

संजीवनी टुडे 23-03-2019 22:26:15


कोलकाता। भाजपा के सांसद और मुख्य वक्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने शनिवार को दावा किया कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। कोलकाता के इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स में "एंगेजिंग पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’’ विषय पर आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि आज देश तेजी से विकसित हुआ है और दुनियाभर के शीर्ष तीन देशों की सूची में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा बार-बार भारत को दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कहे जाने को लेकर भी उन्होंने दोनों नेताओं पर चुटकी ली।

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ना ही वित्त मंत्री अरुण जेटली को अर्थव्यवस्था की जानकारी है क्योंकि वे भारत को पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बताते हैं जबकि भारत इस सूची में तीसरे स्थान पर है। स्वामी ने परोक्ष रूप से प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि प्रधानमंत्री ऐसा क्यों कहते हैं कि भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जबकि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) गणना की वैज्ञानिक रूप से स्वीकार्य प्रक्रियाओं के अनुसार, भारत अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसके पीछे पुख्ता तथ्य देते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि मुझे नहीं पता कि हमारे प्रधानमंत्री यह क्यों कहते रहते हैं कि पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्हें अर्थशास्त्र की जानकारी नहीं है और वित्त मंत्री भी अर्थशास्त्र नहीं जानते। स्वामी ने कहा कि विनिमय दरों पर आधारित गणना के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में पांचवें स्थान पर है।

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उन्होंने कहा कि विनिमय दरें बदलती रहती हैं और रुपये में गिरावट होने के कारण, भारत इस तरह की गणना के आधार पर फिलहाल सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। स्वामी ने कहा कि अर्थव्यवस्था के आकार की गणना का सही तरीका क्रय शक्ति क्षमता है और इसके आधार पर भारत फिलहाल तीसरे स्थान पर है। उन्होंने दावा किया कि अंग्रेजों के आक्रमण से पहले तक भारत और चीन विश्व में क्रमश: पहले और दूसरे स्थान के सबसे समृद्ध देश हुआ करते थे। स्वामी ने कहा कि जवाहर लाल नेहरू ने 1950 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्यता से इन्कार कर दिया था। उन्होंने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री ने कहा था कि यह (स्थायी सदस्यता) चीन को जानी चाहिए। भारत को आज भी उसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। 

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उल्लेखनीय है कि सुब्रमण्यम स्वामी ने हार्वर्ड से अर्थशास्त्र विषय में पीएचडी की है और इसी विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र पढ़ाते भी है। वह अक्सर वित्त मंत्री अरुण जेटली की आलोचना करते रहे हैं।

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