संजीवनी टुडे

चाचा-भतीजे के बीच सियासी जंग की गवाह बनेगी फिरोजाबाद

संजीवनी टुडे 12-03-2019 11:42:49


फिरोजाबाद। लोकसभा चुनाव 2019 का बिगुल बज चुका है। ऐसे में फिरोजाबाद लोकसभा सीट की राजनैतिक सरगर्मियां भी तेज हो गयी हैं। इस संसदीय सीट पर इस बार सैफई परिवार के दो बडे़ दिग्गज चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे है। 

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प्रगतिवादी समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के मुखिया शिवपाल यादव पहले ही इस सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं, वहीं समाजवार्टी पार्टी(सपा) ने राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव को प्रत्याशी बनाया है। 

इस सीट पर चाचा-भतीजे के चुनावी मैदान में उतरने से काफी दिलचस्प है। जबकि भाजपा और कांग्रेस ने अभी अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। जीत का ताज किस के सिर पर बंधेगा यह तो मतदाता तय करेंगे, लेकिन इतना जरूर है कि इस बार की लोकसभा सीट चाचा-भतीजे के बीच सियासी जंग की गवाह जरूर बनेगी।

फिरोजाबाद लोकसभा सीट का इतिहास रहा है कि यह सीट शुरूआती दौर में किसी एक पार्टी की होकर नहीं रही है, लगातार जनता ने अपना मिजाज यहां पर बदला है। साल 1957 में पहली बार इस सीट पर आम चुनाव हुए, जिसमें निर्दलीय नेता ब्रजराज सिंह ने जीत हासिल की। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के चौधरी रघुबीर सिंह को हराया।

इस तरह ब्रज राज सिंह फिरोजाबाद के पहले सांसद बने। 1962 में इस सीट पर कोई चुनाव नहीं हुए और ब्रज राज सिंह का कार्यकाल बढ़ गया। साल 1967 के चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के शिव चरण लाल यहां के दूसरे सांसद बने। 1971 में कांग्रेस ने पहली बार अपना खाता यहां खोला और कांग्रेस नेता छत्रपति अम्बेश यहां के सांसद चुने गए। 

1991 में भारतीय जनता पार्टी ने इस क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित किया और प्रभु दयाल कठेरिया फिरोजाबाद के सांसद बने। कठेरिया ने इस लोकसभा सीट पर लगातार 3 लोकसभा चुनावों में जीत हासिल की और 7 सालों तक यहां से सांसद रहे। 1999 और 2004 में राम जी लाल सुमन समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़े और फिरोजाबाद के सांसद बने। 

2009 में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव यहां के लोकसभा चुनाव में जीते और उसी वर्ष उन्होंने इस सीट से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 2009 के उपचुनाव में कांग्रेस नेता और अभिनेता राज बब्बर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव को हराकर यहां पर जीत हासिल की। 

2014 में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव ने यहां से बड़ी जीत हासिल की। अक्षय यादव 534583 वोट पाकर विजयी हुये, जबकि भाजपा के प्रो. एस पी सिंह बघेल 420524 वोट पाकर दूसरे तथा बसपा के ठाकुर विश्वदीप सिंह 118909 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस के अतुल चतुर्वेदी को मात्र 7447 वोटों पर संतोष करना पड़ा। 

2019 के लोकसभा चुनाव में चाचा-भतीजे के वर्चस्व वाली इस फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर सबकी निगाहें टिकी हैं। सपा-बसपा गठबंधन और शिवपाल यादव के चुनाव लड़ने से 2019 का मुकाबला यहां और दिलचस्प हो गया है। जातिगत आंकड़ों पर नजर डाली जाये तो फिरोजाबाद क्षेत्र में करीब 15 फीसदी से अधिक मुस्लिम जनसंख्या है, जो यहां पर निर्णायक स्थिति में हैं। 

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लोकसभा चुनाव में इस सीट पर मुस्लिम, जाट और यादव वोटरों का समीकरण बड़ी भूमिका निभा सकता है। शिवपाल यादव चुनाव मैदान में है और यदि कांग्रेस ने भी अपना प्रत्याशी उतारा तो यादव और मुस्लिम वोट बिखर सकते हैं। जिससे दोनों तरफ से सपा को नुकसान हो सकता है। ऐसे में अपने ही गढ़ में फिरोजाबाद के सपा सांसद अक्षय यादव की राह चुनौती पूर्ण हो सकती है। 

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